प्राचार्य को स्कूल भेजा जाए,
ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट
इछावर ब्लाक स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल खेरी का हिसाब-किताब ही अलग है इस स्कूल मे पदस्थ प्राचार्य यदाकदा ही स्कूल पहुंचते हैं। और समय डीईओ आफिस सीहोर मे देते हैं। प्राचार्य की अनुपस्थिति के कारण विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो रहा है।
यह कहना है ग्राम खेरी के रहवासियों का, ग्रामीण अजब वर्मा,ओमप्रकाश,देवकरण,सतीश वर्मा,मनोज वर्मा आदि ने बताया कि हमारे खेरी स्कूल की व्यवस्थाएँ पूरी तरह लड़खड़ाई चल रही हैं। प्राचार्य नीलेश सक्सेना को हमारे स्कूल मे भेजा जाए। ग्रामीणों द्वारा बुधवार को इस पूरे मामले से कलेक्टर को भी अवगत कराया गया।
ग्रामीणों ने आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्राचार्य नीलेश सक्सेना सन् 2017 से स्कूल नहीं आ रहे हैं।मात्र 8-15 दिन मे एकबार स्कूल आते हैं और दस्तखत करके लौट जाते हैं। हमारी तरफ से सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
वर्तमान मे स्कूल मे करीब 500 बच्चे अध्ययनरत हैं। रिजल्ट सुधारने के लिए हथकंडे अपनाए जाते हैं। पूर्वकाल के दौरान इस स्कूल का रिजल्ट कुछ ओर था और पिछले वर्ष जब सख्ती के साथ नकल रोकी गई तो कुछ ओर रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि नकल पर इस वर्ष भी प्रतिबंध लगाया जाए।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट
इछावर ब्लाक स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल खेरी का हिसाब-किताब ही अलग है इस स्कूल मे पदस्थ प्राचार्य यदाकदा ही स्कूल पहुंचते हैं। और समय डीईओ आफिस सीहोर मे देते हैं। प्राचार्य की अनुपस्थिति के कारण विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो रहा है।
यह कहना है ग्राम खेरी के रहवासियों का, ग्रामीण अजब वर्मा,ओमप्रकाश,देवकरण,सतीश वर्मा,मनोज वर्मा आदि ने बताया कि हमारे खेरी स्कूल की व्यवस्थाएँ पूरी तरह लड़खड़ाई चल रही हैं। प्राचार्य नीलेश सक्सेना को हमारे स्कूल मे भेजा जाए। ग्रामीणों द्वारा बुधवार को इस पूरे मामले से कलेक्टर को भी अवगत कराया गया।
ग्रामीणों ने आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्राचार्य नीलेश सक्सेना सन् 2017 से स्कूल नहीं आ रहे हैं।मात्र 8-15 दिन मे एकबार स्कूल आते हैं और दस्तखत करके लौट जाते हैं। हमारी तरफ से सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
वर्तमान मे स्कूल मे करीब 500 बच्चे अध्ययनरत हैं। रिजल्ट सुधारने के लिए हथकंडे अपनाए जाते हैं। पूर्वकाल के दौरान इस स्कूल का रिजल्ट कुछ ओर था और पिछले वर्ष जब सख्ती के साथ नकल रोकी गई तो कुछ ओर रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि नकल पर इस वर्ष भी प्रतिबंध लगाया जाए।


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