कल... आएगा कमल... जाएंगे नाथ.... या...? 

शैलेश तिवारी 


उच्चतम न्यायालय ने आखिर मध्य प्रदेश के सियासी ड्रामे का कलाइमेक्स लिखे जाने का दिन तय कर ही दिया। शुक्रवार यानि 20 मार्च को शाम पांच बजे तक कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट से गुजरने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने आज दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद दिया है। कल विधान सभा में कमलनाथ की सरकार जाना प्राथमिक तौर पर तो तय लग रहा है लेकिन राजनीति में कब क्या होगा? कहना मुश्किल होता है और यहीं से कायस लगना शुरू होते हैं। सबके अपने एंगिल और अपनी प्रतिबद्धताएँ...। 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी साफ किया कि इस फ्लोर टेस्ट की वीडियोग्राफी की जाएगी। साथ ही कांग्रेस के बागी विधायकों पर विधानसभा में आने का कोई दबाव नहीं होगा। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों पर बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। आपको बता दें कि कांग्रेस के 22 विधायकों के बागी होने के बाद से कमलनाथ सरकार पर संकट मंडरा रहा है। और भाजपा ने फ्लोर टेस्ट की मांग की थी लेकिन विस अध्यक्ष ने सत्र को 26 मार्च तक स्थगित किया। भाजपा के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और आज उसका फैसला आ गया। 

गुरुवार को शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाएगा। विधानसभा सत्र का एक मात्र एजेंडा फ्लोर टेस्ट करवाना होगा। सभी अधिकारी ये सुनिश्चित करें कि किसी भी तरह आदेश का उल्लंघन न हो। 
कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भाजपा प्रसन्न है कि कमलनाथ सरकार अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर पाएगी और उनकी सरकार सत्ता पर काबिज हो जाएगी। उधर कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ और अन्य नेता सरकार के पास बहुमत होने की बात मीडिया के सामने कहते आ रहे हैं। सवाल है कि सही कौन है? 
पहले नजरिए में कांग्रेस के 22 विधायकों की बगावत हो जाने के बाद सरकार अल्पमत में दिखाई दे रही है। इनमे से छः विधायकों, जो मंत्री थे, के इस्तीफे स्वीकार हो चुके हैं...। इस हिसाब से 222 की संख्या वाली विधानसभा है जिसमे बहुमत सिद्ध कर पाना कांग्रेस के लिए मुश्किल का मैदान है। कांग्रेस अपने बचे 92 एवं सात अन्य सहयोगियों के सहारे 99 के आंकड़े पर ठहरी हुई है। 
दूसरे नजरिए से देखें तो भाजपा के पास भी अभी 107 विधायक हैं जो बहुमत की 112 की संख्या को पूरा करते नजर नहीं आ रहे। लेकिन ये बात तो तबकी है जब कांग्रेस सरकार गिर जाए और राज्यपाल भाजपा को सबसे बड़े दल के रूप में सरकार बनाने का आमंत्रण दें। इस स्थिति में भाजपा को बहुमत सिद्ध करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। 
तीसरे नजरिए से देखें तो भाजपा के दो विधायकों ने बीते समय में कमलनाथ सरकार को अपना समर्थन दिया है तो क्या अब और भी भाजपा विधायकों के टूट कर सरकार के समर्थन में खड़े हो जाने की आशंका है? ऐसी स्थिति में किसके पास कितना संख्या बल होगा? ये देखना तो काफी दिलचस्प होगा। 
इस एंगिल का जिक्र भी राजनैतिक पंडित कर रहे हैं कि कमलनाथ सरकार के सभी कांग्रेस विधायक सामूहिक इस्तीफा दे दें और सीएम विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दें। ऐसी स्थिति में एक और वैधानिक प्रश्न खडा हो जाएगा..? जिसका फैसला  संभवतः राज्यपाल करेंगे। 
इन बिंदुओं के मद्दे नजर कल का दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए... निर्णायक होगा..। कमल की सरकार आएगी... या नाथ की सरकार जाएगी... अथवा प्रदेश में मध्यावधि चुनाव की स्थिति बनेगी..? जो भी होगा... उम्मीद यही की जा सकती है कि.. जनता के हित में हो...।
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