
निर्भया के दोषियों को अल सुबह फांसी दी
नई दिल्ली, एमपी मीडिया पाइंट
दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती सफेद रंग की बस में निर्भया के साथ दरिंदो जैसा कुकृत्य करने वाले चारों दोषियों को आज अल सुबह तिहाड़ जेल के फांसी घर में फंदे पर लटका कर मृत्यु दंड से दंडित किया गया। तमाम कानूनी अड़चनों के बाद अब फांसी का रास्ता साफ हुआ और दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह 5.30 बजे फांसी दी गई। तिहाड़ के बाहर सुरक्षा कड़ी करते हुए अद्धसैनिक बल के जवानों को भी तैनात किया गया।
फांसी देने से पहले तिहाड़ जेल के कई अधिकारी फांसी घर के पास पहुंचे, जिनकी निगरानी में फांसी की प्रक्रिया पूरी हुई। फंदे पर लटकाने से पहले जब दोषियों को नहाने और कपड़े बदलने के लिए कहा गया, तो दोषी विनय ने कपड़े बदलने से इनकार कर दिया। इसके अलावा उसने रोना शुरू कर दिया और माफी मांगने लगा।
दोषियों को फांसी दिए जाते वक्त तिहाड़ जेल के बाहर जुटी भीड़ ने 20 मार्च के इस दिन को निर्भया के लिए सच्ची श्रद्धाजंलि बताया।
फांसी से पहले सुबह 4 बजे चारों दोषियों को उठाया गया और नहाने के बाद नए कपड़े पहनने के लिए कहा गया। इसके बाद दोषियों को जेल प्रशासन की ओर से चाय-नाश्ता पूछा गया, हालांकि किसी ने नाश्ता नहीं किया। निर्भया केस को आज 7 साल बीत जाने के बाद भी पूरे देश को दोषी मुकेश, विनय और अक्षय और पवन की फांसी का इंतजार था। जब दिल्ली के मुनिरका में निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी, उस दिन पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया अपने एक दोस्त के साथ साकेत स्थित सेलेक्ट सिटी मॉल में 'लाइफ ऑफ पाई' मूवी देखने गई थी और ऑटो नहीं मिलने पर एक सफेद रंग की बस में सवार हो गई फिर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती बस में ही दोषियों ने हैवानियत की तमाम सीमाओं को पर किया था।
18 दिसंबर 2012 को घटी घटना के दो दिन बाद दिल्ली पुलिस ने छह में से चार आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया। वहीं 21 दिसंबर 2012 को दिल्ली पुलिस ने पांचवां आरोपी जो नबालिग था उसे दिल्ली से और छठे आरोपी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार किया था। 29 दिसंबर 2012 को निर्भया ने आखिरी सांस सिंगापुर में ली थी।
मामला कोर्ट में चल रहा था और पुलिस ने मामले में 80 लोगों को गवाह बनाया था। सुनवाई के बीच 11 मार्च, 2013 को आरोपी बस चालक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। आज बाकी चार आरोपियों को फांसी देकर निर्भया केस पर पूर्ण विराम लग गया है। इन सात साल में एक नारा बहुत प्रचलित हुआ.... निर्भया हम शर्मिंदा हैं... तेरे कातिल जिंदा हैं...। आज न हम शर्मिंदा हैं और न ही तेरे कातिल जिंदा हैं।


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