आईये आपको लिए चलते हैं समय की टहनी से टूट कर गिरे उन पलों के पास, जो द्वापर युगीन हैं...। दुर्योधन की हठ को पूरा करने... शकुनि ने षड्यंत्र रचा... परिणाम में पांडवो को वनवास मिला... । जंगल - जंगल भटकते पांडव... पहुँच जाते हैं उस तालाब के पास.... जिसका पानी पीने के लिए... वहाँ निवासित एक यक्ष ने शर्त लगा रखी थी... उसके प्रश्नों का उत्तर दिए जाने की.... कि यक्ष के सवालों का जवाब दिए वगैर... पानी पीने की कोशिश जो भी करेगा... वह मृत्यु को प्राप्त हो जायेगा..... यक्ष के प्रश्नों की अनसुनी करते हुए....एक के बाद एक.... भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव मृत हो जाते हैं...। तब उसी तालाब पर पहुँचते हैं ज्येष्ठ पांडव... युधिष्ठिर.। यक्ष उनसे भी सवाल पूंछता है. . . । धर्मराज युधिष्ठिर और यक्ष के बीच... यहाँ पर सवाल जवाब का लंबा एपिसोड चला है...। हमारे मतलब का सवाल यक्ष द्वारा यह पूछा जाता है कि.... इस दुनियाँ मे सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
युधिष्ठिर का जवाब होता है..... मृत्यु...।
यक्ष इसी उत्तर में से सवाल पूछता है.... मृत्यु तो संसार का अटल सत्य है.... फिर यह आश्चर्य कैसे...?
ज्येष्ठ पांडव उत्तर देते हैं.... दुनियाँ का हर व्यक्ति अपने आसपास... रोजाना मृत्यु से साक्षात्कार करता है... यानि आज के संदर्भ मे देखा जाए तो किसी को अस्पताल में इलाज कराते समय यह भी सोचता है कि.... सेहत को भूल कर जिंदगी भर कमाई की.... अब उसी सेहत को पाने के लिए... जिंदगी भर की कमाई को लुटा भी रहा है.... फिर उसी मरीज को मृत्यु का ग्रास बनते देखता है... उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होकर... यह विचार भी करता है कि... खाली हाथ जाने के सारी उम्र दोनों हाथों से समेटने में लगा रहा..। .... लौटते हैं यक्ष और युधिष्ठिर के पास... जहाँ धर्मराज यक्ष को बता रहे हैं कि.... मृत्यु को इतने नजदीक से देखने के बाद भी.... व्यक्ति को इस बात का भरोसा... न जाने क्यों.. ज्यादा होता है.... कि मृत्यु उसको लेने नहीं आएगी...। ये बात ही दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य है...!! यक्ष प्रसन्न होता है... वरदान में सभी पांडवों को जीवन भी दे देता है।
यहीं से आपकी और हमारी कहानी शुरू होती है.... इक्कीस दिन के लॉक डाउन की...। कोरोना का भी यही कहना है... घर से बाहर निकले... और सामुदायिक दूरी नहीं बनाए रखी.... तो मौत आपको मार्फत मेरे अपने आगोश में लेने के लिए तैयार है....। धीरे धीरे आपने दो दिन गुजार लिए हैं..। लेकिन अफ़सोस.... हमारे अपने ही इस लॉक डाउन.. की परिस्थिति को हजम ही नहीं कर पा रहे हैं.... द्वापर में युधिष्ठर के मौत को सबसे बड़े आश्चर्य की तरह.... अब भी ले रहे हैं....। इनमें वो लोग ज्यादा शामिल हैं... जिन्होंने 22 मार्च की शाम को पांच बजे.... से पांच बजकर पांच मिनट तक... ताली, थाली, शंख और घंटी बजाकर... कोरोना के खिलाफ युद्ध घोष किया था....। अब युद्ध के समय पीठ दिखाकर...लॉक डाउन का पालन नहीं कर रहे हैं...।सरकार ने इस विचार के साथ लॉक डाउन किया है कि.... आपके घरों में रहने से उसे वो सब इंतजाम करने का मौका मिल जाएगा... जिन के हो जाने पर... कोरोना को हराना आसान हो जाए...। ऐसे इंतजाम किए भी जाने शुरू हो गए हैं.... मसलन स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के 15 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। गरीबों को राशन दिया जाना, मजदूरों को एक एक हजार देना और एक लाख सत्तर हजार रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा सहित अन्य कदम.... कोरोना को हराने के लिए ही उठाए जा रहे हैं...। देश की 12 हजार 671 ट्रेन को अस्पताल और मेडिकल स्टोर में तब्दील करने पर भी विचार हो रहा है। कोरोना टेस्टिंग किट तेजी से बनाए जाने लगे हैं...। टेस्ट सेंटर भी बढ़ाए जा रहे हैं....। यह सब किसके लिए हो रहा है...आप के लिए.....। आप अकेले घर में नहीं हो... आपका साथ दुनियाँ के तीन सौ करोड़ लोग दे रहे हैं....। यह मौका जिंदगी में बदलाव लाने का भी है... अपने शौक पूरा करने का भी है... जिन्हें समय अभाव में आप अधूरा छोड़े हुए थे...। एकांतवास का अनूठा अनुभव लेने का भी है..। खुद को पहचानने का भी है...। परीक्षा में खरे में नहीं उतरने पर... विश्व स्वास्थ्य संगठन के सचिव... की चेतावनी को ध्यान में रखो... अभी नहीं संभले... तो मई महीने का दूसरा सप्ताह भारत के लिए... भयावह होगा..। आप अपने या आपके प्रियजन.... के लिए ही सही... सामुदायिक दूरी बनाए रखे....। घर में ही रहे...कोरोना के माध्यम से मौत को झपट्टा मारने का मौका न दें...।


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