लेखिका 

जब तू खिलखिला कर हँसता है
सोचती हूँ.....
तेरी किलकारियों मे ही
विद्यमान होते हैं
सातों स्वर !
मासूमियत,चंचलता,कोमलता 
तेरी भोली भाली बातों से 
अठखेलियाँ करतीं 
तेरी तोतली बातों  संग नाचती हैं तो
घर का आँगन बन जाता है मधुबन!
तेरी नटखट आँखों की करामात देखना
तेरे कोमल हाथों की जादुई छुअन
काट देती है मेरे कष्ट !
हर लेती है जीवन की
अनकही पीड़ा !
मेरे जानबूझकर रूठ जाने पर
तेरे प्यार की झड़ी
बिखेर देती है हरियाली 
जिंदगी के बंजर टुकड़े पर !
दिव्य आलोक फैल जाता है जब 
मुख को गोल घुमा तोतले बोल मे जब बोलता है "माँ !!!"
तेरे छोटे से मुंह मे सिमट जाता है ब्रहमाण्ड !
और लफ़्ज माँ मे सिमट जाती है
मेरी दुनिया !!
सोचती हूँ तेरे बेतरतीब बोलों  मे ही
छुपा हैं कहीं शायद 
सभी ग्रंथों का सार!!
मधुबन मे स्नेह रस से भरे 
फूल कलियाँ चुनती
मै बागो बहार हो उठती हूँ 
मन्त्र मुग्ध हुई मैं
"मेरे नन्हें कान्हा !!!"
सोचती हूँ 
तेरा मेरे जीवन मे होना
उस सृजनकर्ता  प्रभु की
प्रत्यक्षता का ही तो प्रमाण हैं !

रितु शर्मा 

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परिचय 

रितु शर्मा शिवालिक नगर, हरिद्वार ,
उतराखंड की निवासी हैं। शिक्षाविद् होने के साथ साथ साहित्य सेवा भी कर रही हैं। 
सांझा काव्य संग्रह -" सारांश समय का " , "गूंज" "काव्य मंजरी काव्य संग्रह"  "शब्दों का प्याला"में कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। अन्य पत्र पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। आपको साहित्य सेवी पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है।
संपादक 
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