लेखिका 

मेरे अपने*********

अब हर बात पर खुशी भी नहीं होती 
 खुशियों  पे भी नमक छिड़कने लगे है मेरे अपने ।

अब  शब्दों से बाण चलाकर 
 कर घायल ,खुश रहने लगे है मेरे अपने ।

शामिल होकर भी शामिल नहीं है 
अब जश्नों में भी अकेले है मेरे अपने ।

बात ही बेबात के चक्रव्युह में 
उलझने लगे है मेरे अपने ।

कई जख्म बन गये है नासूर अब
फिर भी जख्मों को कुरेदने में लगे है मेरे अपने ।

 चाहती है अल्पना  भरा रहे आंगन खुशियों से
अब अल्पना को ही मिटाने में लगे है मेरे अपने ।

खुशियाँ लौट आने की उम्मीद में पथरा गई है आंखें अब
अपने घर में दुख को ही बांटने में लगे है मेरे अपने ।

अल्पना हर्ष ,बीकानेर

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परिचय 


अल्पना हर्ष  पत्नी डा. मनोज हर्ष बीकानेर की रहने वालो हैं। शिक्षण और लेखन दोनों क्षेत्रों में अपनी सक्रियता बनाए रखती है  साझा संग्रह...दीप शिखा , अनकहे,जज्बात, शब्द गंगा , साहित्यान काव्य मंजरी कविता संग्रह सरगम आदि प्रकाशित हो चुके हैं। 
साझा लघुकथा संग्रह अपने अपने क्षितिज , कथारंग और कहानी संग्रह संवेदनाओं का सफर, आस पास से गुजरते हुये प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ समय समय पर प्रकाशित होती रही हैं। आपको अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके है।  जैसलमेर का सामाजिक व सांस्कृतिक इतिहास स्थापना से 1947 तक विषय पर आप शोध कार्य कर चुकी हैं। सामाजिक क्षेत्र में भी आपकी सक्रियता बनी रहती है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक 
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