इछावर तहसील का दूसरा भगोरिया हाट वीरपुर डेम मे,
राजधानी भोपाल तक के लोग पहुंचे मेले मे,
जबरदस्त उत्साह के साथ करीब 5 हज़ार आदिवासियों ग्रामीणों ने की शिरकत
कोलारडेम/वीरपुर डेम से शिवराजसिंह राजपूत, सूरज वर्मा की रिपोर्ट
आदिवासियों के लोक एवं परिणय पर्व की शनिवार को ब्रिजिशनगर से शुरुआत हुई थी इछावर तहसील का दूसरा भगोरिया पर्व रविवार को वीरपुर डेम मे जोरदार उत्साह से मना।
कोलारडेम,खजूरी,लोहापठार,सारस,मगरपाट,झालपीपली,चिकलपानी,आबिदाबाद,
जीवनताल,बावडियाखाल,कलमखेड़ा,गुलरछापरी,नीबूखेड़ा,कठोतिया,ढाबला,लीलाखेड़ी, लालगार,सेगांव,झिरी सहित कोलारडेम के आसपास के करीब दो दर्जन आदिवासी गावों के 5 हजार लोगों ने मेले मे शिरकत की।
मेले मे रंग-बिरंगे परिधानों मे आदिवासी युवक-युवतियां झूले-चकरी का आनंद लेते दिखाई दिए वहीं बांसुरी की तान फाल्गुन मास का सुरों से जैसे स्वागत करती प्रतीत हुई। ढोल-मादल की थाप पर थिरकती युवक-युवतियों की टोलियां मेले की खूबसूरती मे चार चांद लगा रही थीं। इसबार डीजे की अगुवाई मे जुलूस निकला गया जिसमे आदिवासी समाज प्रमुख साफा बांधकर निकले।
मेले मे परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण देखने को मिला। भगोरिया हाट मे परंपरागत आदिवासी वेशभूषा मे युवतियां पहुंची तो वहीं युवक आधुनिक जींस-शर्ट के परिधान मे दिखाई दिए।मेले मे आदिवासी गोदना प्रथा भी दिखाई दी,
युवक-युवतियां अपने हाथों पर खुद के या अपने प्रेमीजन के नाम गुदवाती नजर आई तो इसबार भाग कर विवाह करने की पुरातनी प्रथा प्रायः विलुप्त नजर आई।पान का बीड़ा मौके पर गुलाबी होंठों से कुछ मन की बात अवश्य कहता नजर आया।
महुआ की मंदिरा भी मेले मे मादकता घोले रही, उम्र दराज लोगों पर भी मदिरा के साथ भगोरिया हाट का नशा छाया दिखाई देता रहा। जैसे-जैसे समय बड़ता गया वैसे वैसे मेला शबाब पर आता रहा।
सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से मेले मे विशेष पुलिस बल तैनात किया गया था देर रात तक क्षेत्र मे भगोरिया पर्व का जश्न जारी रहेगा। वीरपुर डेम वह स्थान है जहां सीहोर जिले का सर्वश्रेष्ठ भगोरिया पर्व पुरातनकाल मनाया जाता आ रहा है।
राजधानी भोपाल तक के लोग पहुंचे मेले मे,
जबरदस्त उत्साह के साथ करीब 5 हज़ार आदिवासियों ग्रामीणों ने की शिरकत
कोलारडेम/वीरपुर डेम से शिवराजसिंह राजपूत, सूरज वर्मा की रिपोर्ट
आदिवासियों के लोक एवं परिणय पर्व की शनिवार को ब्रिजिशनगर से शुरुआत हुई थी इछावर तहसील का दूसरा भगोरिया पर्व रविवार को वीरपुर डेम मे जोरदार उत्साह से मना।
कोलारडेम,खजूरी,लोहापठार,सारस,मगरपाट,झालपीपली,चिकलपानी,आबिदाबाद,
जीवनताल,बावडियाखाल,कलमखेड़ा,गुलरछापरी,नीबूखेड़ा,कठोतिया,ढाबला,लीलाखेड़ी, लालगार,सेगांव,झिरी सहित कोलारडेम के आसपास के करीब दो दर्जन आदिवासी गावों के 5 हजार लोगों ने मेले मे शिरकत की।
मेले मे परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण देखने को मिला। भगोरिया हाट मे परंपरागत आदिवासी वेशभूषा मे युवतियां पहुंची तो वहीं युवक आधुनिक जींस-शर्ट के परिधान मे दिखाई दिए।मेले मे आदिवासी गोदना प्रथा भी दिखाई दी,
सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से मेले मे विशेष पुलिस बल तैनात किया गया था देर रात तक क्षेत्र मे भगोरिया पर्व का जश्न जारी रहेगा। वीरपुर डेम वह स्थान है जहां सीहोर जिले का सर्वश्रेष्ठ भगोरिया पर्व पुरातनकाल मनाया जाता आ रहा है।



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