लेखिका 

तुम्हें और क्या दूँ""""""""""""""

अच्छा लगता है,,
जब मेरी मिस कॉल
पर तुम तुरंत काल 
करते हो,,क्या हुआ??
ये कहकर मोहब्बत का 
जज़्बा भरते हो

मैं क्या पहन 
कर जाऊं
मैं क्या सब्ज़ी बनाऊं?
मैं ये न खाऊं,, वो 
न खाऊं
देखो कहीं ,,
मोटी न हो जाऊं
अच्छा लगता है,,,
जब तुम कहते हो
तुम जैसी भी हो ,,
अच्छी लगती हो
बिन मेकअप भी
हसीन लगती हो

तुम देर से आते
हो,,मैं झूठमूठ रुठ
जाती हुँ,, 
तुम हज़ार 
बहाने लगाओगे,मैं
फिर मुँह फुलाती हुँ
अच्छा लगता है,,,
जब तुम कहते हो,,
जाम था बड़ा,,
,मैं कांफ्रेंस मीटिंग में
था फंसा,, तुमसे 
मिलन को व्याकुल था,
हरपल तेरे लिए
ही मैं आतुर था

उस रोज़ भी तुमने
कहा था
थोड़ी देर तो बैठो,,
औऱ मैंने कहा था
अभी थोड़ा सा रुको
काम तो ख़त्म कर लूं
सब्ज़ी ,कपड़े, सब 
काम कर लूँ
अच्छा लगता है,,तुम्हारा
वो हाथ खींच कर अपने
पास बैठाना
औऱ चाय की चुस्कियों में  
नज़रें मिलाना

तुम्हें पता है, तुम 
उदास न हो,इसलिए मैं 
मुस्कुराती हुँ
अपनी बैचेनी कसक 
सब कुछ छिपा जाती हूँ
अच्छा लगता है,,,
तुम सब जान जाते हो
और आगोश में लेकर
फिर समझाते हो,

तुम शिकायत न करते हो
न ही सुना करते हो
छोड़ दिया मैंने भी,
अब,,भूत भविष्य
की उलझनों में पड़ना
वो रोना और वो 
सिसकना,,
अच्छा लगता है,,,
जब तुम पहला कोर
मुझे खिलाते हो
और वो बच्चों सा
लाड लुटाते हो

तुम इतनी मेहनत 
करते हो,,,परिवार के 
लिए दिन रात मरते हो,,
ये खुशनसीबी मेरी,,
कि मेरा एतबार करते हो 
You deserve this,,
ये कहकर पल में
अपना बना जाते हो
अच्छा लगता है,
जब तुम क़रीब
आकर कपाल पर
चुम्बन दे जाते हो,,

मैं बदले में तुम्हें क्या दूं
तुम मेरा गुरूर हो
तुम मेरा सुरूर हो 
अपनी मोहब्बत तुम
मुझपर लुटाते हो
मैं कुछ भी नहीं,,,
ये तुम ही हो,,जो 
"साया" की क़लम 
चलाते हो,,
तन्हाई में भी अपना
एहसास कराते हो😊

सुषमा कुमारी साया
गुरुग्राम,,हरियाणा
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