कोरोना: इंडियन का भारत को दिया गिफ्ट ,
हिंदुस्तान में प्रवेश नहीं कर पाए...
हम उस देश के वासी हैं.... जिस देश में तीन देश रहते हैं....। यह कोई पौराणिक कथा नहीं.... न ही हम इतिहास के पन्नो को आपके सामने खोलने जा रहे हैं....। जिक्र कर रहे हैं.. आज का.... वर्तमान का... जिस काल खंड में आप और हम सांस ले रहे हैं...। उसी वक्त में हम एक साथ.... इंडिया..... भारत.... और हिंदुस्तान में रह रहे हैं...। आपका विचार हो सकता है कि... इन तीनों में अंतर क्या है...?
... बस यहीं से शुरू होती है... ये अजीब दास्ताँ.... कहाँ शुरू... कहाँ खत्म...? दास्ताँ कोई भी हो... उसका आगाज हुआ है... तो अंजाम तक भी पहुंचेगी जरूर...। यही प्रकृति का शाश्वत नियम है....। शुरू करते हैं देश के उस नाम से.... जिसे इंडिया कहते हैं... इसका असली मतलब चाहे जो हो.. निवासियों का वर्गीकरण किए जाने के नजरिए से.. वह देश है.. जिसके निवासी का एक पैर... अपने देश यानि भारत में... तो दूसरा पैर विदेश में रहता है.... इन्हें इंडियन कहा जा सकता है.. इनमें उन तमाम क्रीमी लेयर के लोग शामिल हैं... जिनमे कार्पोरेट घराने भी शामिल हैं...। इन्हें विदेश यात्राओं जरूरी भी हैं... और शौक भी है....। यही जब हाल के बीते दिनों में जब वापस अपने देश भारत लौटे तो... अपने साथ गिफ्ट में कोरोना ले आए...। ताजा उदाहरण है.. कनिका कपूर नाम की वो गायिका... जो मुंबई से दिल्ली होते हुए... लखनऊ पहुंची... पार्टियों में शिरकत की... और कोरोना पॉजिटिव होते हुए इसका खतरा... बाँट दिया.. वो भी ऐसा कि देश के पहले नागरिक तक पहुंचने की संभावना बन गई...। इनको आरोपी बनाया गया... चूंकि कोरोना विदेशी वायरस... तो इसके आरोप भी ब्रिटानिया सरकार द्वारा 1897 में बनाए गए... महामारी नियंत्रण कानून की धारा 188, 269 और 270 के तहत तय किए गए...। उनका यह खतरा खास लोगों से होते हुए... आम लोगों तक पहुंचने की आशंका... बलवती हो गई...। आश्चर्य यह है कि.. कनिका पर तो प्रकरण दर्ज हो गया... लेकिन उनकी पार्टी में शामिल खास लोग... जिन्हें भीड़ में जाने से परहेज रखना था... उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई...। इनमें से कुछ ने खुद को एक पखवाड़े के लिए खुद को क्वारंटाइन कर लिया..। यह अनुकरणीय है....।
दूसरा देश है भारत... जहाँ के लोग छोटे शहरों से लेकर... महानगरों तक में निवास करते हैं..। इन देश के सर्वाधिक साक्षरता वालों के निवास क्षेत्र में ही देश की तमाम स्वास्थ्य का अधिकांश हिस्सा है... लेकिन सभी चेतावनियों और निर्देशों के बाद भी यह लोग ही ज्यादातर कोरोना की चपेट में आए हैं..। अभी तक साढ़े तीन सौ मामले प्रकाश में आ चुके हैं... बीते सोलह घंटों में ही.. कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या... 77 के करीब है...। इसके प्रसार की गति... की तेजी चिंताजनक कही जा सकती है...। कोरोना से मरने वालों का आंकडा भी आधा दर्जन हो गया है।
यहीं पर जिक्र आज यानि 22 मार्च करना होगा.. जब देश का हर नागरिक जनता कर्फ्यू का पालन कर रहा है... लेकिन कोरोना के खिलाफ लडी जा रही जंग में... इंडिया के उन 138 अरबपतियों में से एक ने भी आगे आकर... अपनी तरफ से सहायता दिए जाने की जहमत नहीं उठाई... जिन पर इस देश की सभी बैंकों का इतना कर्ज है कि.. वह एन पी ए के भार से हर दिन बर्बादी की कगार की तरफ बढ़ रही हैं... और कर्ज का वह पैसा भारत के ही नागरिकों का है.. जिसे बैंक से उन्हे बतौर लोन मिला है...। उसी भारत के लोग आज कोरोना से पीड़ित हैं... या उसकी भयावहता से निपटने के लिए घरों में बंद हैं...। इसी लॉक डाउन की स्थिति से एक और परिस्थिति बन रही जो डराती ज्यादा है..। वह है महानगरों में काम करने वाले लाखों करोडो ग्रामीण कामकाजी लोग.. जो वहाँ काम बंद होने से अपने गाँव लौट जाना चाहते हैं....। उन गाँवो की तरफ जहाँ देश की आत्मा बसती है...। इसे हम यहाँ हिंदुस्तान कहेंगे...। फर्ज कीजिये... अगर महानगरों से वापस गाँवो में आने वाले कामकाजी... अपने साथ कोरोना को लेकर आ गए..। और दक्षिण कोरिया के पेशेंट क्रमांक 31 की तरह.. जगह जगह घूमकर इस बीमारी के वायरस फैला दिए... तब क्या होगा...? कहना नहीं होगा कि देश की ज्यादातर आबादी इसी हिंदुस्तान में रहती है... जिसके पास मेडिकल सुविधाओं के नाम पर कुछ झोला छाप डॉक्टर हैं...।
हमारे देश भर के अस्पतालों में (सरकारी और गैर सरकारी मिलाकर) लगभग पंद्रह लाख पलंग हैं.... और आई सी यू के केवल एक लाख बेड हैं...। जांच के केंद्रों की संख्या भी आबादी के अनुपात में बहुत ही कम है..।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 17 मार्च तक 84,000 लोगों पर एक आइसोलेशन बेड और 36000 लोगों पर एक क्वारंटाइन बेड है। इतना ही नहीं आंकड़ों में कहा गया है कि प्रति 11,600 भारतीयों पर एक डॉक्टर और 1,826 भारतीयों के लिए अस्पताल का एक बिस्तर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हमारे देश के मामले में ज्यादा चिंता जता रहा है.....।
अभी तक देश के राज्य सरकारो में से केरल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने ही बेहतर निर्णय लिए हैं.. बाकी सरकारो सहित केंद्र सरकार द्वारा भी बड़े फैसले लिए जाना बाकी है....। जनता तो प्रधानमंत्री के आव्हान पर अपना कर्तव्य निभाने में कोई कोताही नहीं बरत रही है....। लेकिन संसद का चलते रहना अखरता है...। अरबपतियों का आगे न आना सालता है...। जंग में एकजुटता जी जीत दिलाती है..। चीन में परफ्यूम बनाने वाली कई कंपनियों ने रातों रात अपने आप को सेनेटाईजेशन बनाने वाली कंपनियों में तब्दील कर लिया था...। बहुत सी कंपनियों ने मास्क बनाना शुरू कर दिए थे...। कोरोना से लड़ने के लिए.. भारी भरकम आर्थिक पैकेज सरकार ने घोषित किए थे...। इसीलिए कोरोना तुम इंडिया आए... भारत आए... लेकिन हिंदुस्तान कभी मत आना....।
हिंदुस्तान में प्रवेश नहीं कर पाए...
हम उस देश के वासी हैं.... जिस देश में तीन देश रहते हैं....। यह कोई पौराणिक कथा नहीं.... न ही हम इतिहास के पन्नो को आपके सामने खोलने जा रहे हैं....। जिक्र कर रहे हैं.. आज का.... वर्तमान का... जिस काल खंड में आप और हम सांस ले रहे हैं...। उसी वक्त में हम एक साथ.... इंडिया..... भारत.... और हिंदुस्तान में रह रहे हैं...। आपका विचार हो सकता है कि... इन तीनों में अंतर क्या है...?
... बस यहीं से शुरू होती है... ये अजीब दास्ताँ.... कहाँ शुरू... कहाँ खत्म...? दास्ताँ कोई भी हो... उसका आगाज हुआ है... तो अंजाम तक भी पहुंचेगी जरूर...। यही प्रकृति का शाश्वत नियम है....। शुरू करते हैं देश के उस नाम से.... जिसे इंडिया कहते हैं... इसका असली मतलब चाहे जो हो.. निवासियों का वर्गीकरण किए जाने के नजरिए से.. वह देश है.. जिसके निवासी का एक पैर... अपने देश यानि भारत में... तो दूसरा पैर विदेश में रहता है.... इन्हें इंडियन कहा जा सकता है.. इनमें उन तमाम क्रीमी लेयर के लोग शामिल हैं... जिनमे कार्पोरेट घराने भी शामिल हैं...। इन्हें विदेश यात्राओं जरूरी भी हैं... और शौक भी है....। यही जब हाल के बीते दिनों में जब वापस अपने देश भारत लौटे तो... अपने साथ गिफ्ट में कोरोना ले आए...। ताजा उदाहरण है.. कनिका कपूर नाम की वो गायिका... जो मुंबई से दिल्ली होते हुए... लखनऊ पहुंची... पार्टियों में शिरकत की... और कोरोना पॉजिटिव होते हुए इसका खतरा... बाँट दिया.. वो भी ऐसा कि देश के पहले नागरिक तक पहुंचने की संभावना बन गई...। इनको आरोपी बनाया गया... चूंकि कोरोना विदेशी वायरस... तो इसके आरोप भी ब्रिटानिया सरकार द्वारा 1897 में बनाए गए... महामारी नियंत्रण कानून की धारा 188, 269 और 270 के तहत तय किए गए...। उनका यह खतरा खास लोगों से होते हुए... आम लोगों तक पहुंचने की आशंका... बलवती हो गई...। आश्चर्य यह है कि.. कनिका पर तो प्रकरण दर्ज हो गया... लेकिन उनकी पार्टी में शामिल खास लोग... जिन्हें भीड़ में जाने से परहेज रखना था... उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई...। इनमें से कुछ ने खुद को एक पखवाड़े के लिए खुद को क्वारंटाइन कर लिया..। यह अनुकरणीय है....।
दूसरा देश है भारत... जहाँ के लोग छोटे शहरों से लेकर... महानगरों तक में निवास करते हैं..। इन देश के सर्वाधिक साक्षरता वालों के निवास क्षेत्र में ही देश की तमाम स्वास्थ्य का अधिकांश हिस्सा है... लेकिन सभी चेतावनियों और निर्देशों के बाद भी यह लोग ही ज्यादातर कोरोना की चपेट में आए हैं..। अभी तक साढ़े तीन सौ मामले प्रकाश में आ चुके हैं... बीते सोलह घंटों में ही.. कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या... 77 के करीब है...। इसके प्रसार की गति... की तेजी चिंताजनक कही जा सकती है...। कोरोना से मरने वालों का आंकडा भी आधा दर्जन हो गया है।
यहीं पर जिक्र आज यानि 22 मार्च करना होगा.. जब देश का हर नागरिक जनता कर्फ्यू का पालन कर रहा है... लेकिन कोरोना के खिलाफ लडी जा रही जंग में... इंडिया के उन 138 अरबपतियों में से एक ने भी आगे आकर... अपनी तरफ से सहायता दिए जाने की जहमत नहीं उठाई... जिन पर इस देश की सभी बैंकों का इतना कर्ज है कि.. वह एन पी ए के भार से हर दिन बर्बादी की कगार की तरफ बढ़ रही हैं... और कर्ज का वह पैसा भारत के ही नागरिकों का है.. जिसे बैंक से उन्हे बतौर लोन मिला है...। उसी भारत के लोग आज कोरोना से पीड़ित हैं... या उसकी भयावहता से निपटने के लिए घरों में बंद हैं...। इसी लॉक डाउन की स्थिति से एक और परिस्थिति बन रही जो डराती ज्यादा है..। वह है महानगरों में काम करने वाले लाखों करोडो ग्रामीण कामकाजी लोग.. जो वहाँ काम बंद होने से अपने गाँव लौट जाना चाहते हैं....। उन गाँवो की तरफ जहाँ देश की आत्मा बसती है...। इसे हम यहाँ हिंदुस्तान कहेंगे...। फर्ज कीजिये... अगर महानगरों से वापस गाँवो में आने वाले कामकाजी... अपने साथ कोरोना को लेकर आ गए..। और दक्षिण कोरिया के पेशेंट क्रमांक 31 की तरह.. जगह जगह घूमकर इस बीमारी के वायरस फैला दिए... तब क्या होगा...? कहना नहीं होगा कि देश की ज्यादातर आबादी इसी हिंदुस्तान में रहती है... जिसके पास मेडिकल सुविधाओं के नाम पर कुछ झोला छाप डॉक्टर हैं...।
हमारे देश भर के अस्पतालों में (सरकारी और गैर सरकारी मिलाकर) लगभग पंद्रह लाख पलंग हैं.... और आई सी यू के केवल एक लाख बेड हैं...। जांच के केंद्रों की संख्या भी आबादी के अनुपात में बहुत ही कम है..।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 17 मार्च तक 84,000 लोगों पर एक आइसोलेशन बेड और 36000 लोगों पर एक क्वारंटाइन बेड है। इतना ही नहीं आंकड़ों में कहा गया है कि प्रति 11,600 भारतीयों पर एक डॉक्टर और 1,826 भारतीयों के लिए अस्पताल का एक बिस्तर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी हमारे देश के मामले में ज्यादा चिंता जता रहा है.....।
अभी तक देश के राज्य सरकारो में से केरल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने ही बेहतर निर्णय लिए हैं.. बाकी सरकारो सहित केंद्र सरकार द्वारा भी बड़े फैसले लिए जाना बाकी है....। जनता तो प्रधानमंत्री के आव्हान पर अपना कर्तव्य निभाने में कोई कोताही नहीं बरत रही है....। लेकिन संसद का चलते रहना अखरता है...। अरबपतियों का आगे न आना सालता है...। जंग में एकजुटता जी जीत दिलाती है..। चीन में परफ्यूम बनाने वाली कई कंपनियों ने रातों रात अपने आप को सेनेटाईजेशन बनाने वाली कंपनियों में तब्दील कर लिया था...। बहुत सी कंपनियों ने मास्क बनाना शुरू कर दिए थे...। कोरोना से लड़ने के लिए.. भारी भरकम आर्थिक पैकेज सरकार ने घोषित किए थे...। इसीलिए कोरोना तुम इंडिया आए... भारत आए... लेकिन हिंदुस्तान कभी मत आना....।


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