कांग्रेस के प्रभावशाली नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी का दामन थाम लिया है और कांग्रेस का केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व देखता रह गया। कांग्रेस ने कल्पना भी नहीं की होगी कि सिंधिया ऐसा कर सकते हैं लेकिन उपेक्षा के शिकार सिंधिया ने ऐसा कर दिखाया। यहां एक बात जरूर कही जा सकती है कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व चाहता तो सिंधिया को बीजेपी में जाने से रोक सकता था, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। ऐसा ना करके कांग्रेस हाईकमान ने बहुत बड़ी गलती कर ली। सिंधिया जैसे बड़े नेता का पार्टी से चला जाना पार्टी के लिए आघात है। सिंधिया युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। सिंधिया में युवाओं को साधने का हुनर था। सिंधिया राहुल गांधी के राजनैतिक हमसफर थे। दोनों साथ मिलकर सत्ता पक्ष को घेरते थे और सत्ता में रंहकर नीतियों का सृजन करते थे। केंद्र की राजनीति में सिंधिया की अच्छीे पैठ थी। केंद्रीय राजनीति में तो उनका बहुत बड़ा योगदान था। सिंधिया जैसे नेताओं की उपेक्षा आने वाले समय में कांग्रेस को बहुत नुकसानदायक होगी। आज सिंधिया ने पार्टी छोड़ी है, कल राजस्थान में सचिन पायलट भी ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि वह भी उपेक्षा के शिकार हैं। आंध्रप्रदेश में जगनमोहन रेड्डी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी बना चुके हैं। सिंधिया ने दूसरे अन्य नेताओं के लिए भी राह खोल दी है। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस को ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ऐसे सक्रिय नेताओं को खोते चले जाएंगे तो क्या कांग्रेस का भविष्य बच पाएगा, बिल्कुल नहीं। उन्हें पार्टी के दूसरी पंक्ति के नेताओं को दमखम से खड़ा करना होगा। ऐसे तमाशा देखते रहेंगे और एक-एक करके कद्दावर छूटते जाएंगे तो पार्टी गर्त में पहुंच जाएगी। वैसे ही वर्तमान समय में पार्टी रसातल में है। सिंधिया का पार्टी छोड़ना छोटी बात नहीं है। किसी भी कीमत पर कांग्रेस को सिंधिया को ऐसा करने पर रोकना था। सिंधिया कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा नाम था। गांधी परिवार सिंधिया को रोकने में कामयाब हो सकती थी मगर शायद उन्होंने प्रयास नहीं किया। यह बात भी सच है कि भारत युवाओं का देश है। देश की 60% आबादी युवाओं की है। युवा देश की राजनीति में दखल रखते हैं। यदि युवाओं के चेहरे को ना उम्मीद किया जाए तो पार्टी से युवाओं का जुड़ा कैसे होगा। हमने देखा है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में सिंधिया को तो राजस्थान में सचिन पायलट को आगे कर चुनाव लड़ा था। इन दोनों की मेहनत की वजह से पार्टी ने सत्ता हासिल की। लेकिन कांग्रेस ने इन दोनों को तो लूपलाइन में डाल दिया। यदि इन दोनों को सत्ता में तवज्जो दी होती तो युवाओं में नया संदेश जाता। युवाओं का कांग्रेस से मोहभंग नहीं होता। कांग्रेस पार्टी के लिए अभी भी समय है कि वह युवा चेहरों को पार्टी की प्राथमिकता में रखे। कहीं ऐसा ना हो कि सिंधिया जैसे और भी कई नेता हैं जो सिर्फ गुंजाइश का इंतजार कर रहे हैं। इतनी पुरानी पार्टी की ये दुर्दशा हो रही है। किसी ने सोचा नहीं होगा। उसके बाद भी गांधी परिवार कुछ सीख नहीं रहा है। इन सबका जिम्मेदार गांधी परिवार ही है। सिंधिया जैसे नेता बीजेपी में एक बीजेपी में रहकर कांग्रेस का कितना नुकसान करेंगे, यह तो आगे देखा जाएगा।


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