लेखिका
#एकांत_प्रिय_है_मुझे
__________________
एकांत प्रिय है मुझे
वहाँ चलता है
अंतहीन संवादों का सिलसिला,
वहाँ बसंत है हमेशा,
पीली धूप
पीली सरसों
पीताम्बर मन है वहाँ,
लेपकर हल्दी चंदन
निखरता स्वप्न है,
मन के कुसुम पर
बोसे प्रेम के...
हौले से छू जाते हैं जब कभी...
झंकृत हो जाता है
संपूर्ण स्वप्न,
और मन मयूर
नृत्य करता है अपने पंख फैलाकर,
एकांत इसलिए भी प्रिय है मुझे
क्योंकि वहाँ अस्तित्व मेरा
कोई रौंदने नहीं आता,
वहाँ ओढ़कर
अपना स्वाभिमान
मैं उन्मुक्त उड़ सकती हूँ,
परिंदों जैसे चहक सकती हूँ,
कर सकती हूँ मुक्त संवाद
अपने अंतर्मन से,
मुझे प्रिय है एकांत
कि वहाँ कोई आता जाता नहीं,
जी सकती हूँ वहाँ अपना बचपन
जी सकती हूँ उस आँगन में
जहांँ कभी चलना सीखा था मैंने,
जहांँ मेरे सपने सच हो जाते थे,
हाँ...
एकांत प्रिय है मुझे
वहाँ मैं मिलती हूँ मुझसे
और करती हूँ ढे़रों बात
अपने आप से,
अंतहीन संवादों का सिलसिला
कुछ यूँ चलता है एकांत में....
#शिल्पी
#तन्हाई_मेरी_सच्ची_सहेली
----------------
परिचय
शिल्पी अग्रवाल दरियापुर सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश की निवासी हैं।
साहित्य सेवा के धर्म को आप निभाती रही हैं। एकल काव्य संग्रह 'तुम रहोगे न मुझमें' तथा साझा संकलन 'कविता अभिराम' व 'अनुभूतियाँ प्रेम प्रकाशित हो चुकी हैं।
सम्मान एवं पुरुस्कार भी प्राप्त हुए हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक
#एकांत_प्रिय_है_मुझे
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एकांत प्रिय है मुझे
वहाँ चलता है
अंतहीन संवादों का सिलसिला,
वहाँ बसंत है हमेशा,
पीली धूप
पीली सरसों
पीताम्बर मन है वहाँ,
लेपकर हल्दी चंदन
निखरता स्वप्न है,
मन के कुसुम पर
बोसे प्रेम के...
हौले से छू जाते हैं जब कभी...
झंकृत हो जाता है
संपूर्ण स्वप्न,
और मन मयूर
नृत्य करता है अपने पंख फैलाकर,
एकांत इसलिए भी प्रिय है मुझे
क्योंकि वहाँ अस्तित्व मेरा
कोई रौंदने नहीं आता,
वहाँ ओढ़कर
अपना स्वाभिमान
मैं उन्मुक्त उड़ सकती हूँ,
परिंदों जैसे चहक सकती हूँ,
कर सकती हूँ मुक्त संवाद
अपने अंतर्मन से,
मुझे प्रिय है एकांत
कि वहाँ कोई आता जाता नहीं,
जी सकती हूँ वहाँ अपना बचपन
जी सकती हूँ उस आँगन में
जहांँ कभी चलना सीखा था मैंने,
जहांँ मेरे सपने सच हो जाते थे,
हाँ...
एकांत प्रिय है मुझे
वहाँ मैं मिलती हूँ मुझसे
और करती हूँ ढे़रों बात
अपने आप से,
अंतहीन संवादों का सिलसिला
कुछ यूँ चलता है एकांत में....
#शिल्पी
#तन्हाई_मेरी_सच्ची_सहेली
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परिचय
शिल्पी अग्रवाल दरियापुर सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश की निवासी हैं।
साहित्य सेवा के धर्म को आप निभाती रही हैं। एकल काव्य संग्रह 'तुम रहोगे न मुझमें' तथा साझा संकलन 'कविता अभिराम' व 'अनुभूतियाँ प्रेम प्रकाशित हो चुकी हैं।
सम्मान एवं पुरुस्कार भी प्राप्त हुए हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक


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