लेखिका
प्रियतम तुम्हारे
मनमोहक राग
कहो हे कृष्ण !
धुन बाँसुरी की क्यूँ
दृग मेंं दी विराग ?
प्रणयिनी मैं
युगों से हूँ तुम्हारी
सींची प्रेम पराग
कहो हे कृष्ण !
धुन बाँसुरी की क्यूँ
मिटायी अनुराग ?
कहो हे कृष्ण !
प्रीत है क्यूँ अधूरी
क्यूँ विरह मेंं जली ?
यमुना तट
है क्यूँ निर्जन कान्हा
रिक्त है प्रेम कली ?
किस गोपी ने
क्यूँ मोह लिया तुम्हे
क्यूँ त्यागी प्रीत गली ?
कहो हे कृष्ण !
धुन बाँसुरी की क्यूँ
हृस्पंदन को छली ?
संपादक- शैलेश तिवारी
धुन बाँसुरी की.....
प्रियतम तुम्हारे
मनमोहक राग
कहो हे कृष्ण !
धुन बाँसुरी की क्यूँ
दृग मेंं दी विराग ?
प्रणयिनी मैं
युगों से हूँ तुम्हारी
सींची प्रेम पराग
कहो हे कृष्ण !
धुन बाँसुरी की क्यूँ
मिटायी अनुराग ?
कहो हे कृष्ण !
प्रीत है क्यूँ अधूरी
क्यूँ विरह मेंं जली ?
यमुना तट
है क्यूँ निर्जन कान्हा
रिक्त है प्रेम कली ?
किस गोपी ने
क्यूँ मोह लिया तुम्हे
क्यूँ त्यागी प्रीत गली ?
कहो हे कृष्ण !
धुन बाँसुरी की क्यूँ
हृस्पंदन को छली ?
.....अनिमा दास ....कटक , ओडिशा
----------परिचय
अनिमा दास जी पेशे से शिक्षक हैं। समय निकाल कर हिंदी साहित्य की सेवा उड़िया भाषी होने के साथ करती हैं। काव्य पुष्पांजलि और एक अन्य काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। काव्य में नूतन प्रयोग के लिए समाज आपका आभारी है। जिसमें सोनेट का प्रयोग अग्रणीय है। गद्य की विधा में जब आप समझाती है तो सुनने वाला हैरान हो जाता है आपकी बारीक नजर और समझ पर। एम पी मीडिया पॉइंट आभारी है आपका कि आपने अपनी रचना प्रकाशित करने को स्वीकृति दी।संपादक- शैलेश तिवारी


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