लेखक
5 अप्रेल की रात्रि नौ बजे, नौ मिनट का प्रकाश उत्सव मनाने का आग्रह प्रधानमंत्री ने समूचे देश से किया है। उत्सव मनाना अभी बाकी है, इतनी जल्दी नही करनी है ये भी समझना जरूरी है उत्सव मनाने से पहले। ये उत्सव है घर में रहने वाले उन लोगो के लिए जो कैद समझ रहे है और हताशा का जीवन गुजार रहे हैं, नैराश्य का अंधकार उनके अंतस में समा चुका है। वहाँ जरूरत है एक उजियारे की। प्रत्येक माह स्वेच्छा से जब बिजली बचत की बेहतर प्रेरणा भी छिपी है उनके आग्रह भरे संदेश में।
साथ ही प्रकाश का महत्व सबको ज्ञात हो, रामनवमी या हनुमान जयंती, गुरुपर्व, प्रदोष आदि पर हो तो श्रेष्ठ, चारमुखी दिए का अरंडी या सरसो के तेल में हो तो धर्मानुसार बढ़िया, नाद (ध्वनि) व बिंदु(प्रकाश) के हम बने मानव व प्रकृति। big bang सिद्धांत भी यही कहता है। मनोरंजन में ले कर नाद के गलत परिणाम दिग्भ्रमित हो कर इंदौर के लोग भुगत चुके हैं और बाकी उनके समर्थक भुगतेंगे भी। निवेदन है कि रोशनी जलाते हुए उस समय ऐसी जगह रहे जहाँ मलेरिया डेंगू के मच्छर न काटे। क्योंकि जितनी मौत इनसे होती रही हैं उतनी और किसी कारण से नही हुई। घर मे ही रह कर , बराबरी की दूरी बना कर। क्योंकि महात्रासदी से बुद्धिमानी से निपटना है । काफी हद तक, मुखिया मोदी , चिकित्सक, नर्स, स्वास्थ्य। कर्मचारी, पुलिस, व सफाई कामगारों ने और निश्चय ही हम ने भी कोरोना से युद्ध को एक निर्णायक मोड़ पर ले जाने का संकल्प लिया है। न
ध्यान रहे कही ऊपर की बालकनी से न थूक दे, क्योंकि कुछ मनोरोगी वायरस से ज्यादा घातक लोगो को वैसे भी हम पोषित राष्ट्र अपने घरो मे ही कर रहे।
मौका अच्छा है कि मानव की खाल में छुपे असुरों के चेहरे भी सामने आ ही रहे। इनको facial करने से खूबसूरत नही होंगे। न ही इन्हें उबाल लो ..डेटोल में , तब भी sanitize नहीं होने के। हिट छिड़को बिल से बाहर आएंगे या एक कोने में कल्पनाओं के महाआनंद की गाथाएं गाएंगे। फिर धर पकड़ लो इन्हें। क्वारंटाइन नही terminate करना जरूरी, कइयों को तो। मानवाधिकार मानव के लिए होता, ऐसे विषाक्त जीवाणु मानव नही हो सकते। फरिश्ते जीवन बचाने आते उन्ही को पीटने के जुर्म की सजा ये ही।
शिव के भक्त होने के कारण, अवश्य सहिष्णु रहते हम। तभी प्रत्येक जीवन को संरक्षित व जीवन का अधिकार देते। सनातन धर्म ये ही है। किन्तु हमारी कृपा पर यदि कोई भस्मासुर बन जाये तो बेहतर उनका हाथ उन्ही के सर पर रखवा दिया जाए।
ॐ नमो नारायण
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शिष्य महायोगी पायलट बाबा
श्री पंच दशनाम जुना अखाड़ा
शांत अद्वैत आश्रम , जिला आगर मालवा
9617440043, 9711199447
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प्रकाश उत्सव मनाने से पहले.....
5 अप्रेल की रात्रि नौ बजे, नौ मिनट का प्रकाश उत्सव मनाने का आग्रह प्रधानमंत्री ने समूचे देश से किया है। उत्सव मनाना अभी बाकी है, इतनी जल्दी नही करनी है ये भी समझना जरूरी है उत्सव मनाने से पहले। ये उत्सव है घर में रहने वाले उन लोगो के लिए जो कैद समझ रहे है और हताशा का जीवन गुजार रहे हैं, नैराश्य का अंधकार उनके अंतस में समा चुका है। वहाँ जरूरत है एक उजियारे की। प्रत्येक माह स्वेच्छा से जब बिजली बचत की बेहतर प्रेरणा भी छिपी है उनके आग्रह भरे संदेश में।
साथ ही प्रकाश का महत्व सबको ज्ञात हो, रामनवमी या हनुमान जयंती, गुरुपर्व, प्रदोष आदि पर हो तो श्रेष्ठ, चारमुखी दिए का अरंडी या सरसो के तेल में हो तो धर्मानुसार बढ़िया, नाद (ध्वनि) व बिंदु(प्रकाश) के हम बने मानव व प्रकृति। big bang सिद्धांत भी यही कहता है। मनोरंजन में ले कर नाद के गलत परिणाम दिग्भ्रमित हो कर इंदौर के लोग भुगत चुके हैं और बाकी उनके समर्थक भुगतेंगे भी। निवेदन है कि रोशनी जलाते हुए उस समय ऐसी जगह रहे जहाँ मलेरिया डेंगू के मच्छर न काटे। क्योंकि जितनी मौत इनसे होती रही हैं उतनी और किसी कारण से नही हुई। घर मे ही रह कर , बराबरी की दूरी बना कर। क्योंकि महात्रासदी से बुद्धिमानी से निपटना है । काफी हद तक, मुखिया मोदी , चिकित्सक, नर्स, स्वास्थ्य। कर्मचारी, पुलिस, व सफाई कामगारों ने और निश्चय ही हम ने भी कोरोना से युद्ध को एक निर्णायक मोड़ पर ले जाने का संकल्प लिया है। न
ध्यान रहे कही ऊपर की बालकनी से न थूक दे, क्योंकि कुछ मनोरोगी वायरस से ज्यादा घातक लोगो को वैसे भी हम पोषित राष्ट्र अपने घरो मे ही कर रहे।
मौका अच्छा है कि मानव की खाल में छुपे असुरों के चेहरे भी सामने आ ही रहे। इनको facial करने से खूबसूरत नही होंगे। न ही इन्हें उबाल लो ..डेटोल में , तब भी sanitize नहीं होने के। हिट छिड़को बिल से बाहर आएंगे या एक कोने में कल्पनाओं के महाआनंद की गाथाएं गाएंगे। फिर धर पकड़ लो इन्हें। क्वारंटाइन नही terminate करना जरूरी, कइयों को तो। मानवाधिकार मानव के लिए होता, ऐसे विषाक्त जीवाणु मानव नही हो सकते। फरिश्ते जीवन बचाने आते उन्ही को पीटने के जुर्म की सजा ये ही।
शिव के भक्त होने के कारण, अवश्य सहिष्णु रहते हम। तभी प्रत्येक जीवन को संरक्षित व जीवन का अधिकार देते। सनातन धर्म ये ही है। किन्तु हमारी कृपा पर यदि कोई भस्मासुर बन जाये तो बेहतर उनका हाथ उन्ही के सर पर रखवा दिया जाए।
ॐ नमो नारायण
स्वामी शैलेषानन्द गिरी ध्यानश्रीमहामण्डलेश्वर श्री पंच दशनाम जुना अखाड़ा
-------------परिचय
महामंडलेश्वर स्वामी शैलेषानन्द गिरी ध्यानश्रीशिष्य महायोगी पायलट बाबा
श्री पंच दशनाम जुना अखाड़ा
शांत अद्वैत आश्रम , जिला आगर मालवा
9617440043, 9711199447
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