लेखिका
कोरोना के संकट से घर में दुबके लोगों के जीवन में कैद हो जाने जैसी भावना आ गई। कुछ लोगों के विचार डगमगाने लगे। इसी मनोदशा से उबारने के लिए, विगत दिवस आव्हान किया गया कि सब रात नौ बजे नौ मिनट तक रोशनी करें। देश ने एक होकर डगमग जीवन को जगमग कर दिया। एकता के सूत्र में बंधकर ही सफलता पाए जाने का खुशनुमा अहसास भी हुआ।
हमारी परम्परा रही है अंधेरों से मुक्ति हेतु आराधना के दिए का प्रकाश करने की। पवित्र स्थलों पर आरती कर हम प्रदूषण को दूर रख जीवन को प्रकाश से प्रवाहित करने की आराधना करते है...।
परिवारों में सांझ में तुलसी चौरे का दीपक मन मंदिर का दीपक हम में ऊर्जा का उजाला भरता है। नित्य आरती का दीपक विश्वास पैदा करता है। इस एकांतवास में साहित्य में सत्यम , शिवम् , सुंदरम की शक्ति का दिया जलाती हूं...।
हमने युगों से अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से हराकर दुनिया को नई राह बताई है।
जब एक ओर हमारा देश कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है, ऐसे वक्त में भी दीप प्रज्वलन के मौके पर देशवासियों का जज़्बा से पैदा हुआ मनोरम एवं शानदार दृश्य देखकर मन बहुत प्रफुल्लित हो गया, आज सम्पूर्ण भारतवासियों की एकता देखकर बहुत अच्छा लगा, ऐसा लग रहा था मानो पूरे देश में दीपावली जैसा माहौल था। पूरा देश ऐसे कठिन समय में भी सारी चिंताओं से मुक्त होकर मुस्कुरा रहा था दीवाली मनाते हुए वंदे मातरम, भारत माता की जय, जय श्री राम के नारों से वातावरण को गुंजित कर रहा था। ये सब करने से करोना मरे या ना मरे मगर इससे सम्पूर्ण देशवासियों में एकता का परिचय दिखाई दिया और इसी एकता एकजुटता से कोरोना तो क्या बड़ी से बड़ी बीमारी, आपदा से हमारा देश लड़ सकता है उसका सामना कर सकता है। मेरे प्यारे देशवासियों ये भाईचारा एकता हमेशा बनाये रखना। मोदी जी को साधुवाद... सच में महसूस हुआ मेरा देश बदल रहा है...।
इतिहास याद रखेगा इस दिन को
जब पूरा संसार डगमगा रहा था।
तब हमारा हिंदुस्तान जगमगा रहा था...
... लेकिन मुश्किल की इस घडी में दर्शाई गई एकता हमारे राष्ट्रीय चरित्र में शामिल होने की भी जरूरत है। हम सांप्रदायिक सद्भाव को भूल जाते हैं। विखंडन और बिखराव का राग अलापने लगते हैं । सामाजिक लकीरें गहरी खाइयाँ न बन जाये कि हमारे अलगाव का फायदा कोई दुश्मन उठाने में कामयाब हो जाए। और हम फिर से गुलामी के उस गर्त में फंस जाएं, जहाँ से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को निकाला था। आजादी की सांस लेने का मौका दे गए बलिदानियों का बलिदान व्यर्थ न चला जाए। इस पर गौर करते हुए एकजुटता के प्रकाश को अक्षुण बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है।
जैसे हमने ताली-थाली बजाने के बाद आज कोरोना से लड़ रहे योद्धाओं का सम्मान 130 करोड़ देशवासियों की महाशक्ति कल रात 9 बजे एक साथ जागरण किया । पूरा देश एक जुट हुआ एकता की मिशाल कायम की। वह सदा सर्वदा के लिए कायम हो जाए। आओ एक दीप एकता का और जलाएँ... नफरत और घृणा के अंधकार से भी मुक्ति पाएं।
"अंधियारों को मिटाने को हर दीप संकल्पबद्ध है। "
अनुशासन में रहें सभी से निवेदन करबद्ध है
थोड़ा सा काट ले समभाव से ये आपातकाल
ये सभी कार्य हमारी निरोग्यता से ही सम्बध्द है।
देश का बच्चा-बच्चा दीया जला कोरोना भगाने को प्रतिबद्ध है...और भारत की एकता को अक्षुण बनाए रखने को संकल्पित भी...।
वंदे मातरम...।
रीमा मिश्रा " नव्या " आसन सोल ( पश्चिम बंगाल) से हैं। पेशे से आप शिक्षिका हैं लेकिन देश के विभिन्न समाचार पत्रों पर आपके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। आपको आसन सोल नगर निगम से हिंदी पत्रकारिता का सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। प्रकाशित लेख में लेखिका के अपने निजी विचार हैं। जिनमे लेखिका ने कोरोना के कहर के बीच अपने बुजुर्गों के सेवा और देखभाल का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में बुजुर्गों की उपेक्षा को फोकस भी किया है। यह लेख बहुत संवेदनशील है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक
जीत जायेंगे हम.... अगर एक रहे... डगमगाती जिंदगी... जगमगाहट से चमकी
कोरोना के संकट से घर में दुबके लोगों के जीवन में कैद हो जाने जैसी भावना आ गई। कुछ लोगों के विचार डगमगाने लगे। इसी मनोदशा से उबारने के लिए, विगत दिवस आव्हान किया गया कि सब रात नौ बजे नौ मिनट तक रोशनी करें। देश ने एक होकर डगमग जीवन को जगमग कर दिया। एकता के सूत्र में बंधकर ही सफलता पाए जाने का खुशनुमा अहसास भी हुआ।
हमारी परम्परा रही है अंधेरों से मुक्ति हेतु आराधना के दिए का प्रकाश करने की। पवित्र स्थलों पर आरती कर हम प्रदूषण को दूर रख जीवन को प्रकाश से प्रवाहित करने की आराधना करते है...।
परिवारों में सांझ में तुलसी चौरे का दीपक मन मंदिर का दीपक हम में ऊर्जा का उजाला भरता है। नित्य आरती का दीपक विश्वास पैदा करता है। इस एकांतवास में साहित्य में सत्यम , शिवम् , सुंदरम की शक्ति का दिया जलाती हूं...।
हमने युगों से अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से हराकर दुनिया को नई राह बताई है।
जब एक ओर हमारा देश कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है, ऐसे वक्त में भी दीप प्रज्वलन के मौके पर देशवासियों का जज़्बा से पैदा हुआ मनोरम एवं शानदार दृश्य देखकर मन बहुत प्रफुल्लित हो गया, आज सम्पूर्ण भारतवासियों की एकता देखकर बहुत अच्छा लगा, ऐसा लग रहा था मानो पूरे देश में दीपावली जैसा माहौल था। पूरा देश ऐसे कठिन समय में भी सारी चिंताओं से मुक्त होकर मुस्कुरा रहा था दीवाली मनाते हुए वंदे मातरम, भारत माता की जय, जय श्री राम के नारों से वातावरण को गुंजित कर रहा था। ये सब करने से करोना मरे या ना मरे मगर इससे सम्पूर्ण देशवासियों में एकता का परिचय दिखाई दिया और इसी एकता एकजुटता से कोरोना तो क्या बड़ी से बड़ी बीमारी, आपदा से हमारा देश लड़ सकता है उसका सामना कर सकता है। मेरे प्यारे देशवासियों ये भाईचारा एकता हमेशा बनाये रखना। मोदी जी को साधुवाद... सच में महसूस हुआ मेरा देश बदल रहा है...।
इतिहास याद रखेगा इस दिन को
जब पूरा संसार डगमगा रहा था।
तब हमारा हिंदुस्तान जगमगा रहा था...
... लेकिन मुश्किल की इस घडी में दर्शाई गई एकता हमारे राष्ट्रीय चरित्र में शामिल होने की भी जरूरत है। हम सांप्रदायिक सद्भाव को भूल जाते हैं। विखंडन और बिखराव का राग अलापने लगते हैं । सामाजिक लकीरें गहरी खाइयाँ न बन जाये कि हमारे अलगाव का फायदा कोई दुश्मन उठाने में कामयाब हो जाए। और हम फिर से गुलामी के उस गर्त में फंस जाएं, जहाँ से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को निकाला था। आजादी की सांस लेने का मौका दे गए बलिदानियों का बलिदान व्यर्थ न चला जाए। इस पर गौर करते हुए एकजुटता के प्रकाश को अक्षुण बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है।
जैसे हमने ताली-थाली बजाने के बाद आज कोरोना से लड़ रहे योद्धाओं का सम्मान 130 करोड़ देशवासियों की महाशक्ति कल रात 9 बजे एक साथ जागरण किया । पूरा देश एक जुट हुआ एकता की मिशाल कायम की। वह सदा सर्वदा के लिए कायम हो जाए। आओ एक दीप एकता का और जलाएँ... नफरत और घृणा के अंधकार से भी मुक्ति पाएं।
"अंधियारों को मिटाने को हर दीप संकल्पबद्ध है। "
अनुशासन में रहें सभी से निवेदन करबद्ध है
थोड़ा सा काट ले समभाव से ये आपातकाल
ये सभी कार्य हमारी निरोग्यता से ही सम्बध्द है।
देश का बच्चा-बच्चा दीया जला कोरोना भगाने को प्रतिबद्ध है...और भारत की एकता को अक्षुण बनाए रखने को संकल्पित भी...।
वंदे मातरम...।
रीमा मिश्रा"नव्या"आसनसोल(पश्चिम बंगाल)
-------------------परिचय
रीमा मिश्रा " नव्या " आसन सोल ( पश्चिम बंगाल) से हैं। पेशे से आप शिक्षिका हैं लेकिन देश के विभिन्न समाचार पत्रों पर आपके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। आपको आसन सोल नगर निगम से हिंदी पत्रकारिता का सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। प्रकाशित लेख में लेखिका के अपने निजी विचार हैं। जिनमे लेखिका ने कोरोना के कहर के बीच अपने बुजुर्गों के सेवा और देखभाल का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में बुजुर्गों की उपेक्षा को फोकस भी किया है। यह लेख बहुत संवेदनशील है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक


Post A Comment: