भोपाल: एमपी मीडिया पाइंट 

 शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में नई सरकार बनने के 29 दिन बाद राज्य में मंत्रिमंडल का गठन हुआ है. आज पांच मंत्रियों ने शपथ ली है. जिन पांच मंत्रियों ने शपथ ली है, उनमें दो सिंधिया खेमे के हैं. सिंधिया खेमे से तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत मंत्री बने हैं, इन दोनों लोगों ने कमलनाथ सरकार से इस्तीफा दे दिया था। चुनावी इतिहास मे कांग्रेस को 7 बार धूल चटाने वाले भाजपा के कद्दावर नेता, पूर्व राजस्व मंत्री, इछावर  विधायक करणसिंह वर्मा की अनदेखी की गई है !!


चौथी बार सीएम बने थे शिवराज सिंह चौहान


मध्य प्रदेश में 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सीएम बने थे, लेकिन अगले दिन ही लॉकडाउन का एलान होने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया था.

तुलसी सिलावट, गोविंद राजपूत के अलावा नरोत्तम मिश्रा, मीना सिंह और कमल पटेल मंत्री बने हैं. मंत्रिमंडल गठन में क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का खास ध्यान रखा गया है. नरोत्तम मिश्रा का ग्वालियर-चंबल से नाता है, तुलसी सिलावट मालवा से हैं, गोविंद राजपूत बुंदेलखंड से हैं, मीना सिंह महाकौशल व विंध्य और कमल पटेल निमांड़ इलाके से आते हैं. साथ ही जातीय समीकरण को भी महत्व दिया गया है.


बीजेपी सरकार की वापसी में खास भूमिका निभाने वाले नरोत्तम मिश्रा ने भी ली शपथ


बता दें कि तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत विधायक नहीं है. ये पिछली सरकार में मंत्री थे. लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने पर कमलनाथ सरकार से इस्तीफा देकर बीजेपी से जुड़ गये. मंत्री पद की शपथ लेने वाले नरोत्तम मिश्रा पार्टी के वरिष्ठ विधायक हैं और बीजेपी की सरकार वापसी में उनकी खास भूमिका है. इसके अलावा कमल पटेल हरदा के विधायक और जाट नेता हैं. साथ ही विधायक मीना सिंह आदिवासी पूर्व मंत्री और महिला कोटे से मंत्री बनीं हैं. तुलसी सिलावट कमलनाथ सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे. वहीं गोविंद राजपूत परिवहन और राजस्व मंत्री रह चुके हैं.


कांग्रेस के 22 विधायकों ने दे दिया था इस्तीफा


वर्तमान में मध्य प्रदेश कोरोना की महामारी से जूझ रहा है. इसी के चलते छोटे मंत्रिमंडल का गठन हुआ है. बता दें कि राज्य में कांग्रेस के 22 विधायकों द्वारा बगावत कर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था. 23 मार्च की रात को शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उसके बाद से ही मंत्रिमंडल गठन के कयास लगाए जा रहे थे.

खास बात यह कि कांग्रेस को 7 बार पटकनी देने वाले पूर्व राजस्वमंत्री एवं इछावर विधायक करणसिंह वर्मा को शुरुआती पांच मंत्रियों की सूची मे रखना भी भाजपा ने मुनासिब नहीं समझा। जबकि नवांगत भाजपाईयों को तबज्जो दी गई। राजनीतिक विशारदों के मतानुसार भाजपा के नींव के पत्थर कहे जा जाने वाले आरएसएस को भी दरकिनार किया गया है।
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