पुलिस की कायरता... जाँच के घेरे में.. 


खाकी वर्दी... अनुशासन के साथ जिम्मेदारियां निभाने में..... कानून के मुताबिक... शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जानी जाती है..। इसी वर्दी में है.... एक रोब... एक खौफ भी... जो जन मानस को आश्वस्त करता है.. सुरक्षित जीवन जीने के लिए...। वही वर्दी... जब अपनी जान बचाने के लिए... किसी की जिंदगी को दांव पर लगा दे..... तब उस वर्दी पहनने वाले की कायरता साफ झाँकती है...। पुलिस को सवालों के कटघरे में... खड़ा कर देती है...। 
हम जिक्र कर रहे हैं... महाराष्ट्र के पालघर जिले में... घटी मॉब लिंचिंग की घटना का... जिसमें जूना अखाड़ा के दो साधूओ और एक उनके वाहन चालक.... की भीड़ द्वारा पीट पीट कर की गई... निर्मम हत्या की...। हालांकि पुलिस ने खुद पर भी हमला होना दिखाया है...। मामले की दो एफ आई आर 77/20 और 78/20 दायर की गई हैं...। एक भीड़ द्वारा साधुओं पर हमला कर जान लेने की.... तो दूसरी पुलिस पर हमला किए जाने की....। कुछ पुलिस कर्मी निलंबित भी किए गए हैं....। 
यह भी सर्व विदित सत्य है कि.... भीड़ ने बच्चों को मारकर किडनी चुराने की अफवाह के चलते... उनकी हत्या की...। इस तरह के दो मामले उसी स्थान पर पहले भी घटित हो चुके हैं...। दूसरी गलती साधूओ की भी है... जो पुलिस द्वारा हाई वे से नही गुजरने देने की वजह से... उस कच्ची सड़क पर उतर कर.. अपने गुरु की अंत्येष्टि में शामिल होने चल पड़े... जहाँ मौत उनका इंतजार कर रही थी...। वहाँ के रिपोर्टर की माने तो... वाहन पर भारी पथराव से घायल होने पर भी.. एक साधू ने फ़ोन से पुलिस को सूचित कर दिया...। पुलिस मौके पर पहुँच भी गई...। भीड़ से घायल साधूओ को बचाकर... वन विभाग की बीट चौकी... के कमरे में भी ले गए..। लेकिन भीड़ के उत्तेजित चरित्र ने... पुलिस को उसकी ड्यूटी भुला दी....। एक वीडियो में एक पुलिस कर्मी एक घायल साधू को उस कमरे से बाहर लाता हुआ... दिख रहा है... जो साधू को भीड़ के हवाले कर देता है... भीड़ अपनी निर्ममता पर उतर आती है..। नतीजा पूरे देश के सामने है...। 
इसके उलट पुलिस का कहना है कि.. भीड़ ने उस पर भी हमला किया.. आत्म रक्षा के लिए हवाई फायर किए जाने का भी उल्लेख है...। यहीं से सवालों का जन्म होता है... पुलिस ने भीड़ के पैरों पर गोली क्यों नहीं चलाई...?भीड़ को समझाने या नियंत्रित करने के लिए क्या प्रयास हुए..? मौके पर कितना पुलिस बल मौजूद था..? आला अधिकारियों को घटना की सूचना वायरलेस से कब दी गई...?
ऐसे अनेक सवालों का जवाब जाँच के बाद मिलेगा...। जो कई स्तर पर होगी... पुलिस की अपनी जाँच... प्रशासन की अपनी जाँच... गुप्तचर एजेंसियों की अपनी जाँच...। ऐसी जांचों की रिपोर्ट कब आएगी...? उसका परिणाम क्या निकलेगा... इससे सबक क्या लिया जाएगा...? यह सब आने वाला वक्त तय करेगा...। हाल फिलहाल तो पुलिस ने घटना के आरोपियों के तौर पर एक सौ दस लोगो के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर... उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया है...। इनमे नौ नाबालिग भी बताये जाते हैं...।

शैलेश तिवारी 

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