लेखिका 


कविता - गन्तव्य


मैं
अनन्त यात्रा
पर हूँ
पग-पग पर काँटे बिछे हुए हैं
पैरों के छाले
नज़रअंदाज़ करती हुई
बढ़ रही हूँ
अपने गन्तव्य की ओर
अँधेरी गुफाओं के
मुँह से होते हुए आ रही हूँ
चट्टानों की ओर।

दूरी से चट्टानें
स्वभाव की सख्त लगती हैं
पास से,
लाचार-बेबस
खुरदरे तन को लिये खड़ी हंै।

बीच-बीच में
काले-काले बादलों का गरजना
तेज़-तेज़ हवाओं का बहना
यात्रा में बाधाएँ उत्पन्न करना
मन को विचलित-सा करता है।

परन्तु....
एक ओर से
बढ़ता हुआ प्रकाश
उम्मीद की किरण लाया है
पर्वतों के मुख पर-
चमकीली
गहराती धूप का
खिलता हुआ साया है।


 अनुभूति गुप्ता, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश


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परिचय

अनुभूति गुप्ता, लखीम पुर खीरी , उत्तरप्रदेश की निवासी हैं। उच्च शिक्षित बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। साहित्य सेवा में कविता, कहानी, लघुकथा, हाइकु, क्षणिकाएं आदि लिखने के साथ प्रकाशन एवं संपादन, स्वतंत्र लेखिका एवं चित्रकार (रेखाचित्र, जलरंग चित्र, पेस्टल ड्राइंग), नेचर फोटोग्राफर, कवर डिज़ाइन एवं logo डिजाइन.. आदि में भी आपको महारत हासिल है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। काव्य कोष में भी आपकी कविताओं का संग्रह है।
बाल सुमन (बाल-काव्य संग्रह), कतरा भर धूप (काव्य संग्रह), अपलक (कहानी संग्रह) आदि का प्रकाशन हो चुका है। पत्थर की संवेदनाएं (रेखाचित्र संग्रह) शीघ्र प्रकाशित होने वाला है। आपके रेखा चित्र भी विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। आपको अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। कई पुस्तक एवं पत्रिकाओं का संपादन भी आपके द्वारा किया जा चुका है। एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है।
संपादक

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