शासन की बेरुखी से गरीब खाने दाने से परेशान।
आष्टा के जावर तहसील के ग्राम कुरावर में बाल्मीक समाज के लगभग 5 परिवार शासन की बेरुखी के कारण इस कोविड 19 कोरोना महामारी जे चलते भूखों मरने की स्थिति में गए है ।आपको बतादे की इस समय जबकि व्यापार व्यवसाय पूरी तरह से बंद जैसे पड़े है ।वही गरीब किसी भी रूप में मजदूरी भी नही कर पा रहा है , ओर स्तानीय स्तर और जिस प्रकार सामाजिक किचिन संचालित हो गरीबो मेभोजन वितरण हो रहा था उसका भी लगभग सभी जगह विराम जैसा लग गया है ।ऐसे में स्थानीय मजदूर , ओर गरीब तबका खासा परेशान हो गया गया गए ।खाने दाने से परेशान इन गरीब परिवारों की आज कोई भी सुध लेने को तैयार नही है ।
जहाँ तक शासन की मदद को देखे तो शासन द्वारा की गई आर्थिक मदद 500 रुपये सज ऊंट के मुँह में जीरा जैसी हो गयी है ।
परिस्थिति ज्यादा खराब होने पर अब यह गरीब परिवार शासन से ही उम्मीद लगाए बैठे है । की शासन हम भूखों की मदद करे । कयोकि कोरोना महामारी के चलते आगे भी हमे कोई काम या मजदूरी मिलती नही दिखाई दे रही है ।
ग्रामीण गब्बर तम्बोलिया कुरावर ।
दिनेश शर्मा, आष्टा एमपी मीडिया पाइंट
जावर के ग्राम कुरावर में रह रहा बाल्मीकि समाज कोरोना महामारी के चलते सभी काम धंधे ठप्प हो जाने से राशन पानी से मोहताज हो गए है और शासन से उदर पूर्ति की गुहार लगा रहे है ।आष्टा के जावर तहसील के ग्राम कुरावर में बाल्मीक समाज के लगभग 5 परिवार शासन की बेरुखी के कारण इस कोविड 19 कोरोना महामारी जे चलते भूखों मरने की स्थिति में गए है ।आपको बतादे की इस समय जबकि व्यापार व्यवसाय पूरी तरह से बंद जैसे पड़े है ।वही गरीब किसी भी रूप में मजदूरी भी नही कर पा रहा है , ओर स्तानीय स्तर और जिस प्रकार सामाजिक किचिन संचालित हो गरीबो मेभोजन वितरण हो रहा था उसका भी लगभग सभी जगह विराम जैसा लग गया है ।ऐसे में स्थानीय मजदूर , ओर गरीब तबका खासा परेशान हो गया गया गए ।खाने दाने से परेशान इन गरीब परिवारों की आज कोई भी सुध लेने को तैयार नही है ।
जहाँ तक शासन की मदद को देखे तो शासन द्वारा की गई आर्थिक मदद 500 रुपये सज ऊंट के मुँह में जीरा जैसी हो गयी है ।
परिस्थिति ज्यादा खराब होने पर अब यह गरीब परिवार शासन से ही उम्मीद लगाए बैठे है । की शासन हम भूखों की मदद करे । कयोकि कोरोना महामारी के चलते आगे भी हमे कोई काम या मजदूरी मिलती नही दिखाई दे रही है ।


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