लेखक
तुम्हारे प्रसिद्धि के शिखर से
ऊंची है मेरी शोहरत की मीनार ...
कुछ कम नहीं है
आभा मेरे लफ्जों की गुंबद की
तुम्हारे शब्दों के कलश से....
हीरे मोती से जड़ी है,
मेरी अलंकारिक भाषा की दीवार ,
चांदी की खिड़की
और सोने के द्वार...
क्या यही है हमारी प्रार्थना
इबादत और अरदास
सच मानो तो कहते हैं
हम बस आदमी ही है खास....
मेरी सफेदी तुम्हारी सफेदी से
ज्यादा सफेद है
क्या यही है द्वंद का आभास ....।
द्वंद का आभास.....
तुम्हारे प्रसिद्धि के शिखर से
ऊंची है मेरी शोहरत की मीनार ...
कुछ कम नहीं है
आभा मेरे लफ्जों की गुंबद की
तुम्हारे शब्दों के कलश से....
हीरे मोती से जड़ी है,
मेरी अलंकारिक भाषा की दीवार ,
चांदी की खिड़की
और सोने के द्वार...
क्या यही है हमारी प्रार्थना
इबादत और अरदास
सच मानो तो कहते हैं
हम बस आदमी ही है खास....
मेरी सफेदी तुम्हारी सफेदी से
ज्यादा सफेद है
क्या यही है द्वंद का आभास ....।


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