लेखिका
कुछ तो टूट गए हैं
कुछ छूट गए हैं
ये भी सच है कुछ
रिश्ते रूठ गए हैं
दिल की बस्ती में बसे
जां तक जा पहुंचे
हाँ मगर जाते जाते हमें
भी तोड़ गए हैं
जी सको तो जी लो
इन्हीं कसमों वादों में
सच अगर जाना तो
लहुलुहान हुए हैं
वो तो दिल लगाने को
बहुत है उलझने
ख़ाली जो बैठे तो जी
का सुकून जाए हैं
दिल में भर लाये थे
समंदर की लहरें
रुख़ हवाओं का देख
कर दिल टूट गए हैं
यहाँ मतलब से मतलब
है हरेक इंसा को
माँगा किसी ने हाथ
तो बस दूर गए हैं
वो जो चल रहे थे पकड़
कर ऊँगली मेरी
वक्त के साथ जानां वो भी बदल गए है...
कुछ तो टूट गए हैं
कुछ छूट गए हैं
ये भी सच है कुछ
रिश्ते रूठ गए हैं
दिल की बस्ती में बसे
जां तक जा पहुंचे
हाँ मगर जाते जाते हमें
भी तोड़ गए हैं
जी सको तो जी लो
इन्हीं कसमों वादों में
सच अगर जाना तो
लहुलुहान हुए हैं
वो तो दिल लगाने को
बहुत है उलझने
ख़ाली जो बैठे तो जी
का सुकून जाए हैं
दिल में भर लाये थे
समंदर की लहरें
रुख़ हवाओं का देख
कर दिल टूट गए हैं
यहाँ मतलब से मतलब
है हरेक इंसा को
माँगा किसी ने हाथ
तो बस दूर गए हैं
वो जो चल रहे थे पकड़
कर ऊँगली मेरी
वक्त के साथ जानां वो भी बदल गए है...
आभा चन्द्रा..
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