छत्तीसगढ़ :निगम मंडलों में नियुक्तियों की सुगबुगाहट,
प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के हस्तक्षेप से बढ़ते अंतर्कलह  

विजया पाठक 

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार बनने के 18 महीने बाद निगम मंडल और आयोगों में नियुक्तियों  को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है l बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह में निगम मंडलों में 10 से 12 राजनीतिक नियुक्तियां हो जाएंगी l प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया इन नियुक्तियों में बहुत दिलचस्पी ले रहे हैं l मतलब साफ है कि पुनिया इन नियुक्तियों में पूरा हस्तक्षेप करेंगे और अपने लोगों को पावर में लाएंगे l पुनिया  के हस्तक्षेप से एक बार फिर प्रदेश में अंतर्कलह की स्थिति निर्मित होगी l वरिष्ठता और योग्यता को दरकिनार कर पुनिया  की मंशा है कि अधिक से अधिक लोग स्वयं के हो l निश्चित है कि पिछले 15 साल से सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे नेताओं को यह बात नागुजार गुजरेगी l लेकिन पीएल पुनिया अपनी हठधर्मिता और आर्थिक लाभ के चलते सरकार और संगठन की मंशा को प्राथमिकता नहीं देंगे l वैसे भी कोरोना संकट काल में बजट खर्च में की गई कटौती को देखते हुए चर्चा थी कि इन नियुक्तियों को टाला जा सकता है लेकिन पुनिया के प्रयासों के आगे सरकार भी नियुक्तियों के पक्ष में आ गई है l इससे पहले अब तक केवल तीन  नियुक्तियां की गई है l पहले लोकसभा चुनाव फिर विधानसभा के उपचुनाव फिर नगरीय निकाय चुनाव और बाद में पंचायत चुनाव के कारण नियुक्तियां टलती गई l इसके बाद विधानसभा के बजट सत्र के कारण फिर टला था l कोरोना काल में तो इन नियुक्तियों पर तो ब्रेक लग गया था l अभी स्थिति साफ हो गई है कि एक सप्ताह के भीतर नियुक्तियां हो जाएगी l हालांकि नियुक्तियों को लेकर सत्ता और संगठन में तालमेल का अभाव देखा जा रहा है l मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चाहते हैं कि पार्टी नेताओं की वरिष्ठता और योग्यता को ध्यान में रखकर नियुक्तियां की जानी चाहिए लेकिन पुनिया की मंशा कुछ और ही है l यही कारण है कि पिछले कई माह से यह नियुक्तियां टलती जा रही है l नियुक्तियों में पुनिया के बढ़ते हस्तक्षेप से यही लगता है कि फिलहाल प्रदेश में सत्ता और संगठन में गुटबाजी और असंतोष पनप रहा है l मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तमाम कोशिशें कर स्थिति को संभाल रहे और गुटबाजी ऊपर नहीं आ रही है l लेकिन यह बात भी सत्य है कि आखिर कब तक स्थिति को संभाला जा सकता हैं l पीएल पुनिया का हस्तक्षेप बढ़ने से पार्टी और सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है l बावजूद उसके पुनिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं l किसी ना किसी मामले को लेकर वह सरकार की मुश्किलें बढ़ा देते हैं l 
अब समय आ गया है कि पार्टी हाईकमान भी पीएल पुनिया की कारगुजारीयों पर ध्यान दे l हस्तक्षेप की एक सीमा होती है l समय रहते ध्यान नहीं दिया तो स्थितियां बिगड़ जाएंगी l वर्तमान मुख्यमंत्री सबको साथ लेकर चल रहे है l उनकी कोशिश है कि पार्टी की अंतर्कलह किसी भी कारण बाहर नहीं चाहिए l सबकी योग्यता और सबकी योग्यता का बखूबी उपयोग कर रहे हैं लेकिन पुनिया के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण भूपेश बघेल के प्रयासों में  मुश्किलें पैदा हो रही हैं l
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