मणिका_एक मिसाल

मात्र दस वर्ष की छोटी सी बच्ची थी मणिका पर अभी से बहुत समझदार थी वो। आजकल के आधुनिक युग में जहां बच्चे हर वक्त इंटर्नेट और गेम्स में लगे रहते हैं वहीं मणिका अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त घर के पीछे बने बगीचे में लगाया करती थी।उसे बागबानी का बहुत शौक था। उसकी पसंद, नापसंद दूसरे बच्चों से बिल्कुल भिन्न थी। छोटी सी मणिका में उदारता, सहृदयता, प्रेम और अपनापन कूट कूट के भरा हुआ था। अपने स्कूल में भी वो सबकी प्रिय छात्रा थी और मां पापा की तो वो जान और आंखों का तारा थी।

उसके इस रूझान में मां भी उसका भरपूर साथ देती थीं।  पर्यावरण दिवस आने वाला था, मणिका ने मां को बताया कि एक प्रतियोगिता रखी गयी है, जो बच्चा पंद्रह दिन के अंदर ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाएगा उसे पर्यावरण मंत्री द्वारा इनाम देकर सम्मानित किया जाएगा। 

मणिका को तो जैसे मनचाहा काम मिल गया हो। उसके घर के करीब एक बस्ती थी, उसने सोचा घर में तो पूरा बगीचा है क्यूं न बस्ती में जाकर सबको प्रोत्साहित  करूं, कि वो अपने आसपास पेड़ पौधे लगाएं जिससे हरियाली भी रहे और सबको भरपूर आक्सीजन भी  मिलती रहे। उसने अपना ये विचार मां पापा को बताया तो उन्होंने भी अपनी बेटी की इस सोच को सहर्ष स्वीकारा और सराहा।

अगले दिन मणिका अपनी मां के साथ उस बस्ती में पहुंची, दोनों मां बेटी ने मिलकर सबसे बात की, उनकी स्वीकृति पाकर उन्होंने  पास के ही एक जमीन के टुकड़े को बगीचे का रुप देने की सोची, तरह तरह के पौधे इकट्ठे किए और रोपाई शुरु कर दी, उन सबकी मेहनत रंग लाई। पंद्रह दिनों के अंदर वो जमीन का टुकड़ा सुंदर सा बगीचा बन चुका था।

उसी बस्ती में पर्यावरण मंत्री का ड्राइवर भी रहता था, मणिका के इस सराहनीय कदम की ख़बर जब उन तक  पहुंची तो उन्होंने उस बस्ती का दौरा किया और अपनी आंखों से मणिका द्वारा किया गया ये अनोखा कार्य देखा। उन्होंने प्रसन्न होकर मणिका को भरी सभा में सम्मानित किया और सब बच्चों को उससे प्रेरणा लेने की बात भी कही।

मणिका के इस शौक को सबकी सराहना मिली और वो सबके स्नेह का पात्र भी बनीं। सभी बच्चों को मणिका से प्रेरणा लेनी चाहिए और ऐसे काम करने चाहिए जिससे उनका और उनके मां_ पापा का नाम रोशन हो और वो समाज में एक मिसाल बनकर सामने आएं।

निधि भार्गव मानवीगीता कालोनी ईस्ट दिल्ली

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परिचय 

निधि भार्गव मानवी गीता कालोनी,  दिल्ली की निवासी हैं। गृहणी होने के साथ साथ साहित्य के सेवा करती रहती हैं। 
आपके चार साझा काव्य संकलन और एकल काव्य संग्रह - अनकहे जज़्बात नाम से प्रकाशित हो चुका है। दो पुस्तकें शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। कई टीवी चैनल पर आप काव्य पाठ भी कर चुकी हैं। आपको विभिन्न मंचों से पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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