लेखिका
जिसमे न बस का इंतज़ार है ,
न पैदल स्कूल जाने का मज़ा है ,
बस घर बैठे कंप्यूटर के सामने पढ़ना है l
जिसमे न प्रार्थना सभा है ,
न पीटी है न व्यायाम है ,
बस घर पर कंप्यूटर के सामने बैठना है l
ये कैसी ऑनलाइन शिक्षा है ?
जिसमे न खेल का मैदान है ,
न घंटी का इंतज़ार है ,
बस अकेले ही कंप्यूटर के सामने पढ़ना है l
जिसमे न भावनात्मक जुड़ाव है,
बस ज्ञानात्मक ही ज्ञानात्मक है ,
मनोप्रेरणा का अत्यंत अभाव है l
क्या यही ऑनलाइन शिक्षा है ?
मैं इसकी विरोधी नहीं ,
पर क्या यही शिक्षा का भविष्य है ?
विकट स्थितियों में यह शिक्षा स्वीकार्य है l
लेकिन हमें अपनी मूल शिक्षा पद्धति पर आना है ,
जहाँ छात्रों का सर्वांगीण विकास होना है ,
जहाँ गुरुओं का ध्रुव - स्थान निश्चित है l
संपादक
ऑनलाइन शिक्षा
ये कैसी ऑनलाइन शिक्षा है ?जिसमे न बस का इंतज़ार है ,
न पैदल स्कूल जाने का मज़ा है ,
बस घर बैठे कंप्यूटर के सामने पढ़ना है l
जिसमे न प्रार्थना सभा है ,
न पीटी है न व्यायाम है ,
बस घर पर कंप्यूटर के सामने बैठना है l
ये कैसी ऑनलाइन शिक्षा है ?
जिसमे न खेल का मैदान है ,
न घंटी का इंतज़ार है ,
बस अकेले ही कंप्यूटर के सामने पढ़ना है l
जिसमे न भावनात्मक जुड़ाव है,
बस ज्ञानात्मक ही ज्ञानात्मक है ,
मनोप्रेरणा का अत्यंत अभाव है l
क्या यही ऑनलाइन शिक्षा है ?
मैं इसकी विरोधी नहीं ,
पर क्या यही शिक्षा का भविष्य है ?
विकट स्थितियों में यह शिक्षा स्वीकार्य है l
लेकिन हमें अपनी मूल शिक्षा पद्धति पर आना है ,
जहाँ छात्रों का सर्वांगीण विकास होना है ,
जहाँ गुरुओं का ध्रुव - स्थान निश्चित है l
यही प्रभावी शिक्षा पद्धति है l अर्चना ‘आर्ची’
-------- लेखिका अर्चना जी जकार्ता , इंडोनेशिया से हैं और साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र मे अपनी सेवाएँ देती रहती हैं। प्रतिष्ठित अखबारों मे आपके विचार प्रमुखता से शाया होते हैं। एमपी मीडिया आपके विचारों का स्वागत करता है।संपादक


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