लेखिका
जिसे ही देख के चेहरे पे है निखार आये
बता दे कोई हमें उस पे क्यों न प्यार आये
मिला बहुत न कोई अब है तमन्ना अपनी
उसी के दर से ही क़िस्मत को हम सँवार आये
नहीं बुझा है दिया अब तलक मुहब्बत का
वफ़ा की राह में बेशक कहर हज़ार आये
नहीं लगे है सुहाना हसीन मंजर भी
हुज़ूर जाने कहाँ दिल को कर फ़िगार आये
करार दिल को मिला नाज़ भी है 'साया' को
तुम्हारे अंजुमन में शब जो इक गुजार आये
ग़ज़ल
********जिसे ही देख के चेहरे पे है निखार आये
बता दे कोई हमें उस पे क्यों न प्यार आये
मिला बहुत न कोई अब है तमन्ना अपनी
उसी के दर से ही क़िस्मत को हम सँवार आये
नहीं बुझा है दिया अब तलक मुहब्बत का
वफ़ा की राह में बेशक कहर हज़ार आये
नहीं लगे है सुहाना हसीन मंजर भी
हुज़ूर जाने कहाँ दिल को कर फ़िगार आये
करार दिल को मिला नाज़ भी है 'साया' को
तुम्हारे अंजुमन में शब जो इक गुजार आये


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