छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित नान घोटाला............
क्या अनिल टुटेजा को मिलेगा भूपेश सरकार में अभयदान?
नान घोटाले के आरोपियों पर मेहरबानी क्यों?
एसएसपी रैंक के अधिकारी को क्यों बनाया ईओडब्ल्यू का चीफ

विजया पाठक 
एडिटर, जगत विज़न

छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और बहुचर्चित नान घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार की सुर्खियां घोटाले को लेकर नहीं हैं बल्कि घोटालों में फंसे आरोपियों पर मेहरबानी को लेकर है। राज्य के मौजूदा भूपेश सरकार एक-एक कर सभी आरोपियों को अभयदान देने की स्थिति में है। जबकि रमन सरकार में विपक्ष में रहते कांग्रेस में नान घोटाले को लेकर रमन सरकार की नींद हराम कर दी थी। प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक इस मामले को उठाया गया था। अब जब राज्य में कांग्रेस की ही सरकार आ गई है तो सरकार इन्हें बचाने की कोशिशों में लगी है। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नॉन घोटालेबाजों को किसी भी सूरत में अभयदान देने के पक्ष में नहीं हैं लेकिन किन्हीं कारणों से आरोपी सरकार का हिस्सा बने हुए हैं। नान  घोटाले का मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा इस वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ है। दूसरी तरफ टुटेजा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईडी ने अभियोग चलाने की अनुमति मिलने के पश्चात चालान पेश कर दिया है। वहीं नान घोटाले के एक आरोपी आलोक शुक्ला को रिटायर होने के बाद तीन साल के लिए और एक्सटेंशन दे दिया गया है। समझ से परे है कि ऐसे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें उपकृत किया जाना कहां तक उचित है।
जहां तक नान घोटाले में ईओडब्ल्यू की जांच की बात की जाए तो इस पर भी संदेह पैदा हो रहे हैं। क्योंकि वर्तमान में ईओडब्ल्यू का प्रमुख एक एसएसपी रैंक का अधिकारी आरिफ शेख हैं। जबकि इस पद पर एडीजी,डीजीपी,आईजी रैंक का अफसर ही आसीन हो सकता है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि नान घोटाले में फंसे आरोपियों ने जानबूझकर छोटे स्तर के अधिकारी को इस पद पर बिठवाया है ताकि वह आरोपियों के मन मुताबिक‍ काम कर सके। इससे पहले इस पद पर आईजी रैंक के अधिकारी थे। जो ईमानदारी से जांच कर रहे थे और आरोपियों के हिसाब से जांच को आगे नहीं‍ बढ़ा रहे थे। यही कारण रहा कि उन्हें हटाकर आरिफ शेख को प्रमुख बना दिया है।
उच्च न्यायालय से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों पर ध्यान दें तो अनिल टुटेजा नान घोटाले का एक आरोपी और वास्तुकार है। जिसके खिलाफ एसीबी, ईओडब्ल्यू छत्तीसगढ़ ने पहले ही न्यायालय में चालान दायर किया है। उल्लेखनीय है कि यह मामला जनवरी 2015 में दर्ज किया गया था और पहली चुनौती मई 2015 के महीने में लगाई गई थी। वह वर्ष 2016 में भारत सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के बावजूद छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्य सचिव के विश्वास पात्र होने के बावजूद उनके खिलाफ चुनौती देने में सफल रहे। हालांकि विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा से ठीक पहले दूसरा चालान दिसंबर 2018 में रखा गया, जिसमें अनिल टुटेजा (मो.नं 7828580803, 7974188970, 8815860940) का नाम था। शुरू से ही वह क़ानून की नियत प्रकिया को खंगालने की कोशिश करता रहा है। अनिल टुटेजा ने सत्ता के गलियारों में अपनी स्थिति के कारण हमेशा भूमि सौदों के प्रबंधन और उनकी सुविधा के लिए भूमि उपयोग बदलने के पक्ष में सरकार के नीतिगत फैसलों की अग्रिम जानकारी ली थी। चुनाव की प्रक्रिया के दौरान अनिल टुटेजा कांग्रेस के लिए भाजपा सरकार की विभिन्न खामियों और कमजोरियों को लीक करने में कामयाब रहे। जिसके आधार पर वे वर्तमान सरकार के काफी करीब आ गए। हालांकि टुटेजा का मुख्य उद्देश्य यह है कि वर्तमान सरकार से उनकी निकटता का लाभ उठाकर नान घोटाले की सुनवाई को रद्द किया जाए। जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी हो रहा है। प्रदेश के मुखिया को नान घोटाले के मुख्य आरोपियों से नान घोटाले के तह तक जाने के लिए मदद लेनी चाहिए। न कि उन्हें उपकृत करने की। सीएम भूपेश बघेल को घोटाले के जुड़े सभी आरोपियों को प्रशासन में विभिन्न पदों से हटा देना चाहिए ताकि इनके विरूद्ध की जा रही जांच में सहयोग मिल सके। घोटालेबाजों को सहयोग देने या साथ रखने में उनकी छबि ,खराब ही हो सकती है।
क्रमश:
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