नई दिल्ली, एमपी मीडिया पाइंट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  रविवार सुबह 11 बजे "मन की बात" कार्यक्रम में देश को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कारगिल विजय दिवस, कोरोना महामारी, लोकल फॉर वोकल और बाढ़ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की, उन्होंने कार्यक्रम मे काफी महत्वपूर्ण बातें कहीं,जैसा कि वह पूर्व कार्यक्रमों के दौरान करते आए हैं। खासबात यह है कि मध्यप्रदेश के "कोरोना संक्रमित" मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के एक निजि अस्पताल के वार्ड मे मोदी के मन की बात को गोर से सुना जबकि वहां उनका उपचार चल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने फोकस किया कि 21 साल पहले आज के ही दिन कारगिल के युद्ध में हमारी सेना ने भारत की जीत का झंडा फहराया था. कारगिल का युद्ध जिन परिस्थितियों में हुआ था वो भारत कभी नहीं भूल सकता है.
पाकिस्तान ने बड़े-बड़े मंसूबे को पालकर भारत की भूमि हथियाने और अपने यहां चल रहे आंतरिक कलह से ध्यान भटकाने को लेकर दुस्साहस किया था। भारत तब पाकिस्तान से अच्छे संबंधों के लिए प्रयासरत था।
कारगिल युद्ध के समय मुझे भी कारगिल जाने और हमारे जवानों की वीरता के दर्शन का सौभाग्य मिला था. वो दिन मेरे जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है।
देश के नौजवानों से आग्रह है कि आज दिनभर कारगिल विजय से जुड़े हमारे जाबाजों की कहानियां, वीर-माताओं के त्याग के बारे में, एक-दूसरे को बताएं और शेयर करें.
कारगिल युद्ध के समय अटल जी ने लालकिले से जो कहा था वो आज भी हम सभी के लिए बहुत प्रासंगिक है. अटल जी ने तब देश को गांधी जी के एक मंत्र की याद दिलाई थी।अटल जी ने कहा था कि कारगिल युद्ध ने हमें एक दूसरा मंत्र दिया है- ये मंत्र था कि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले हम ये सोचें कि क्या हमारा ये कदम उस सैनिक के सम्मान के अनुरूप है जिसने उन दुर्गम पहाड़ियों में अपने प्राणों की आहुति दी थी.
हमारा आचार-व्यवहार, हमारी वाणी, हमारे बयान, हमारी मर्यादा, हमारे लक्ष्य कसौटी में जरूर रहना चाहिए कि हम जो कर रहे हैं, कह रहे हैं, उससे सैनिकों का मनोबल बढ़े, उनका सम्मान बढ़े।
 कभी-कभी हम इस बात को समझे बिना सोशल मीडिया पर ऐसी चीजों को बढ़ावा दे देते हैं जो हमारे देश का बहुत नुकसान करती हैं. कभी-कभी जिज्ञासा वश फॉरवर्ड करते रहते हैं, पता है गलत है ये फिर भी करते रहते हैं.
आज हमारे देश में रिकवरी रेट अन्य देशों के मुकाबले बेहतर है. साथ ही हमारे देश में कोरोना से मृत्युदर भी दुनिया के ज्यादातर देशों से काफी कम है. पिछले कुछ महीनों से पूरे देश ने एकजुट होकर जिस तरह कोरोना से मुकाबला किया है. उसने अनेक आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है।
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