लेखिका 

दिग्गज

कैसे-कैसे दिग्गज लड़ रहे
सियासत के गलियारों में
स्वच्छ श्वेत धवल रंगों के पीछे
क्या धोखे हुए हैं वादों में
कर्म पर उनका जोर नहीं
कुर्सियों की दौड़ है
देश के हालात जो भी हो
दिल उनका मांगे मोर है
जूझ रहा है कोना कोना
महामारी बेरोजगारी से
खाली सब बैठे हैं ऐसे
सूझता नहीं कुछ 
दिमागी गलियारों में
खरीद फरोख़्त बातें खोकों में 
सफेदों पर कहां से आते हैं
वहां नोटों के गलीचे 
किस तरह बिछाए जाते हैं
 खून चूसने वाले 
कौन प्रजाति ये  मच्छर हैं
नोच नोच कर कतरा कतरा 
जश्न मनाए जाते हैं
देश की जनता महामारी की मारी 
बेरोजगारी से भी हैं सांसे हारी
फिर भी राजनीति में जोश है 
सफेद पोशों को कहां होश है
शराब, पेट्रोल ,खाद्य पदार्थ 
भ्रष्टाचार से किनके घर पलते हैं 
आम जनता से पूछो कैसे
तीन वक्त की रोटी से 
दो वक्त की रोटी पर 
आ चुके हैं 
जो करना है तुम करो 
रोजगार की खोलो राहें 
नहीं तो छोड़ दो गद्दियां 
ना दिखाओ अपने कारनामे 
ना दिखाओ अपने कारनामे

सौम्या दुआ, हल्दवानी, नैनीताल, उत्तराखंड

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