---कितनी अभागिन होती हैं प्रेमिकाएं--

                           लेखिका 
जानते हो? कौन होती हैं ?
वो अभागिन प्रेमिकाएं,
जिन्हें मिल नहीं पाता ।
साथ जीवन भर ,
अपने प्रेमी का ।

इन प्रेमिकाओं का ,
कोई नाम नहीं होता है।
कोई चेहरा भी नहीं होता है,
अनामिका होती हैं प्रेमिकाएं ।

जानते हो?
इनके वो प्रिय प्रेमी, 
पुकार नहीं सकते जोर से।
अपनी प्रेमिकाओं के नाम,
सार्वजनिक स्थानों पर ।
 उन्हें अनदेखा कर देते हैं ,
दुनिया की इस भीड़ में।


बेचारी प्रेमिकाएं  ,
अपने प्रेमी के एकांत की साथी होती हैं ,
जहां उनके प्रिय प्रेमी फुसफुसाते हैं ।
 उनका नाम,और कहते हैं  ,
उनके चेहरे को चाँद - चंद्रमुखी।

जानते हो?
इनके वो प्रिय प्रेमी, जब माँ की मृत्यु से टूटते हैं।
बहन की विदाई से अकेले होते हैं ,
पत्नी की जिल्लत से जब परेशान होते हैं।
आकर अपनी प्रेमिकाओं की बाहों में ही पनाह पाते हैं...।

इनके वो प्रिय प्रेमी ,
अपने दुखों का अस्थि -कलश ,
प्रेम की गंगा में विसर्जित कर देना चाहते हैं,
पता ही नही  चलता कब वो प्रेमी,
एकायक शिशु -सा बन जाता है।
प्रेमिका इस शिशु को मन में धारण करती है,
छिपा लेती है अपने आँचल में ।
प्रेम का ये सबसे पवित्र क्षण होता है,
 ये पवित्र क्षण केवल एकांत में ही संभव हो पाता है।

अपने मौज में वो प्रेमी,
उस प्रेमिका को कभी फूल कहता है।
 कभी खुशबू पुकारता है,
कभी जानू कभी जानेमन कहकर चिढाता है।
कभी कहता है काश तुम पहले मिली होती तो,
तुमसे ही शादी करता।
जवानी  में मिलती तो हम साथ फिल्म देखने चलते,
अब तो कोई न कोई टकरा जाएगा थिएटर में।
यूँ सबके सामने तमाशा बनाना ठीक नहीं,
प्रेमिका अनसुना करती है।
प्रेम को तमाशा पुकारना ,उसे अच्छा नहीं लगता...।

जब पूछती है वो अपने प्रेमी से ,
चाय तो पियोगे न ।
खूब अदरक डाल के बनाती है चाय ,
देर तक खौलती-उबालती है।
वो जानती है पसंद है उसके प्रेमी को मीठी चाय,
एक चम्मच चीनी ज़्यादा डाल देती है।
पर अभागिनी पूछ भी नहीं पाती ,
की कैसी बनी थी चाय ।
बस अपने प्रेमी के जूठे चाय के कप को ,
स्पर्श कर लेती है अपने होठों से.।

जानते हो?
वो प्रेमिका अपने प्रेमी के सुख की सबसे ,
आखिरी हिस्सेदार होती है ।
और उसके दु:ख की पहली साथी बनती है,
प्रमोशन मिलने पर वो प्रेमी।
सबसे पहले पत्नी को फोन करता है,
ओर चैक बाउंस हो जाने पर प्रेमिका को।

बिचारी प्रेमिका पूछती है ,
बताओ कितने पैसों की जरूरत है ।
कहो तो कुछ इंतज़ाम करूँ ,
प्रेमी पैसे को इनकार करता है ।
कहता है नहीं, मैं तो बस बता रहा ,
तुमसे पैसे कैसे ले सकता हूँ ।
प्रेमिका को जाने क्यूं ख़याल आता ,
पैसे प्रेम से अधिक क़ीमती है ।
वो कहना चाहती है की ,
सुनो...।
 प्रेम दे दिया फिर पैसे क्या चीज़ है ,
लेकिन कहते-कहते रुक जाती ।
ये फिल्मी डायलॉग सा सुनाई देता ,
इस उम्र में ये चोंचलेबाजी अच्छी नहीं लगती।

जब कभी वो प्रेमिका ,
अचानक से मॉल में टकराती है अपने प्रेमी से।
वो देखती है अपने प्रेमी को ,
 अनदेखा करने की कोशिश करती।
लेकिन पहचान लेती है उसे प्रेमी की पत्नी,
जो प्रेमिका को अपने पति की सहकर्मी के रूप में जानती है।

जब पूछती है उसके प्रेमी की पत्नी,
 प्रेमिका का हाल ।
कितने दिन बाद मिली आप ,
कैसी हैं क्या कर रही हैं आजकल?
बेचारी प्रेमिका, 
बिल्कुल नज़रअंदाज़ करती है प्रेमी को।
और बड़े प्रेम से बातें करती है अपने प्रेमी के पत्नी से,
फिर जल्दी का बहाना बना निकल जाती है बाहर ।

अब जब रात को प्रेमिका फोन करती है ,
  प्रेमी बताता है पत्नी पूछ रही थी  ।
सुंदर लग रही थी वो लड़की,
प्रेमिका को छेड़ते हुए कहता है।
मेरे प्रेम ने तुम्हें खूबसूरत बना दिया,
बिचारी प्रेमिका फिर भी नहीं बताती की।
कल लौटते हुए अपने आंसूओ पर काबू पाया,
बडी मुश्किल से और कहती है ...सुनो।

कल खरीदी थी ,
तुम्हारे फेवरेट कलर की टीशर्ट।
कल मिलकर ले जाना,
आता है प्रेमी ले जाने टीशर्ट ।
और...
निकलते-निकलते प्रेमिका से कहता है,
सुनो घर जा रहा हूँ ।
अब मैसेज मत करना ,
फोन बच्चों के हाथ में होता है अक्सर।

पिछले दिनों को याद कर वो प्रेमिका ,
रुआसी - सी हो जाती है।
जाते हुए प्रेमिका का माथा चूमने की आदत थी प्रेमी को,
अब जब प्रेमिका को नहीं मिलता वो स्नेह।
बस अब अपने आंसूओं को आंखों में छुपाये,
एक हंसीं मुस्कान के साथ विदा करती है प्रेमी को 
कार में बैठते ही प्रेमी को भेजती है एक कोमल संदेश,
फिर कोई जवाब न पाकर सोचती है।
सच मे !
कितनी अभागिन होती हैं प्रेमिकाएं।

रीमा मिश्रा"नव्या"
आसनसोल(पश्चिम बंगाल)
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