लेखिका
अब मेरी सहमी सी वो सूरत न रही,
चश्म नम करने की तो आदत न रही l
हम तलब में ही तेरी बेताब रहे,
पास तेरे ही कभी फुरसत न रही ll
हाल दिल का हम सुनाये तो किसे,
यार के दिल में जवां उल्फत न रही ll
हम सनम से साथ तेरा मांग रहे, l
और कोई मेरी तो हसरत न रही ll
दूर खुद से कर लिया है नाम तेरा,
अब तुझे पाने की तो चाहत न रही l
जब किसी से कुछ नहीं उम्मीद रखी,
है सकूं 'रीनू' हमें दिक्कत न रही l
संपादक
अब मेरी सहमी सी वो सूरत न रही,
चश्म नम करने की तो आदत न रही l
हम तलब में ही तेरी बेताब रहे,
पास तेरे ही कभी फुरसत न रही ll
हाल दिल का हम सुनाये तो किसे,
यार के दिल में जवां उल्फत न रही ll
हम सनम से साथ तेरा मांग रहे, l
और कोई मेरी तो हसरत न रही ll
दूर खुद से कर लिया है नाम तेरा,
अब तुझे पाने की तो चाहत न रही l
जब किसी से कुछ नहीं उम्मीद रखी,
है सकूं 'रीनू' हमें दिक्कत न रही l
"रीनू शर्मा" टोरंटो, कनाडा
-------------------परिचय
रीनू शर्मा, टोरोंटो, ओंटारियो, कनाडा में निवास करती हैं। आप वहाँ पर टीचर के रूप में कार्यरत हैं। साथ साहित्य से लगाव होने के साथ आप अपनी लेखनी के माध्यम से साहित्य सेवा में संलग्न हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है।संपादक


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