अजब पुलिस का... गज़ब करिश्मा
आज बात सीहोर की... सक्रिय पुलिस की... मामला आष्टा क्षेत्र का..... वारदात परम्परागत तरीके की.... लेकिन कार्यवाही सवालिया निशान के घेरे में.... । बात को पहले तफ़्सील से समझ लिया जाए.... मामला हमेशा की तरह उस जरायम पेशा लोगों से जुड़ा है..... जो वारदात को अंजाम नहीं देने की एवज में.... जो वसूली करते हैं उसको यहाँ नेपा कहा जाता है....। इस बात को सुनकर बहुत से पाठक चौँक गए होंगे... लेकिन साथियों ये बात चौँकने से ज्यादा समझने की है.... सीहोर जिले के आष्टा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में यह... गोरखधंधा सालों से अपने पैर जमाए हुए हैं... पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों की आवाजाही के साथ साथ... सरकारें भी बदल गई.... लेकिन नहीं बदली तो आष्टा क्षेत्र की ग्रामीणों की किस्मत... जो पीढ़ियों से... कंजर लोगों को तय शुदा वक्त पर... तय शुदा राशि....इस बात के लिए अदा करते आये हैं... कि उनके खेतों पर लगे कृषि उपकरण चोरी न जाएं... उनके ट्रैक्टर आदि अन्य वाहनों को रातों रात... लापता होने से बचाया जा सके.... यह बात आपको अजीब लग सकती है लेकिन है... सोलह आने सही...। फिल्म शोले के उस सीन से मेल खाती हुई कि.... अगर गब्बर से तुम्हें कोई बचा सकता है... तो वह है खुद गब्बर....। ठीक इसी तर्ज़ पर कंजर.... अपने ही कहर से बचाने की एवज में ग्रामीणों से नेपा वसूली करते हैं....।
ताज़ा मामला इसी कड़ी से जुड़ा हुआ है... आष्टा के पार्वती थाने का है... जिसका इस्तगासा पुलिस ने... एस डी एम न्यायालय प्रस्तुत किया है.... जिसमें एक कंजर दारा सिंह द्वारा नेपा वसूली की बात को लेकर.... ग्राम पटारिया गोयल में लोगों को धमका रहा है.... सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पहुंचती है... और कंजर को समझाने का प्रयास करती है... ये इस्तगासे में लिखा भी गया है.... लेकिन कोई कार्यवाही नहीं करती है... अंत में उसको गिरफ्तार किया जाता है.... उस पर अपराध भी कायम किया जाता है... जो धारा 151 के तहत किया जाता है... इसका मतलब केवल शांति भंग करने का प्रयास... जबकि पुलिस ने खुद ही अपने इस्तगासे... में खुद यह कबूल किया है कि.... आरोपी नेपा वसूली पर अड़ा था... अब उन परिस्थितियों की कल्पना कीजिये कि... किस मजबूरी में पुलिस ने... आरोपी पर अड़ीबाजी और धमकाने की धाराओं... का आरोपी नहीं बनाया... साधारण धाराओं में... आरोपी बना कर... अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली....? पुलिस की कार्यवाही से... ग्रामीणों के हौसले पस्त और.. आरोपियों के मस्त हो जाने का वातावरण... बना तो है...? अब आप भी कहेंगे कि... हमारी अजब पुलिस ने... गज़ब कार्यवाही को अंजाम... देने में किन परिस्थितियों से सुलह की होगी.....।
आज बात सीहोर की... सक्रिय पुलिस की... मामला आष्टा क्षेत्र का..... वारदात परम्परागत तरीके की.... लेकिन कार्यवाही सवालिया निशान के घेरे में.... । बात को पहले तफ़्सील से समझ लिया जाए.... मामला हमेशा की तरह उस जरायम पेशा लोगों से जुड़ा है..... जो वारदात को अंजाम नहीं देने की एवज में.... जो वसूली करते हैं उसको यहाँ नेपा कहा जाता है....। इस बात को सुनकर बहुत से पाठक चौँक गए होंगे... लेकिन साथियों ये बात चौँकने से ज्यादा समझने की है.... सीहोर जिले के आष्टा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में यह... गोरखधंधा सालों से अपने पैर जमाए हुए हैं... पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों की आवाजाही के साथ साथ... सरकारें भी बदल गई.... लेकिन नहीं बदली तो आष्टा क्षेत्र की ग्रामीणों की किस्मत... जो पीढ़ियों से... कंजर लोगों को तय शुदा वक्त पर... तय शुदा राशि....इस बात के लिए अदा करते आये हैं... कि उनके खेतों पर लगे कृषि उपकरण चोरी न जाएं... उनके ट्रैक्टर आदि अन्य वाहनों को रातों रात... लापता होने से बचाया जा सके.... यह बात आपको अजीब लग सकती है लेकिन है... सोलह आने सही...। फिल्म शोले के उस सीन से मेल खाती हुई कि.... अगर गब्बर से तुम्हें कोई बचा सकता है... तो वह है खुद गब्बर....। ठीक इसी तर्ज़ पर कंजर.... अपने ही कहर से बचाने की एवज में ग्रामीणों से नेपा वसूली करते हैं....।
ताज़ा मामला इसी कड़ी से जुड़ा हुआ है... आष्टा के पार्वती थाने का है... जिसका इस्तगासा पुलिस ने... एस डी एम न्यायालय प्रस्तुत किया है.... जिसमें एक कंजर दारा सिंह द्वारा नेपा वसूली की बात को लेकर.... ग्राम पटारिया गोयल में लोगों को धमका रहा है.... सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पहुंचती है... और कंजर को समझाने का प्रयास करती है... ये इस्तगासे में लिखा भी गया है.... लेकिन कोई कार्यवाही नहीं करती है... अंत में उसको गिरफ्तार किया जाता है.... उस पर अपराध भी कायम किया जाता है... जो धारा 151 के तहत किया जाता है... इसका मतलब केवल शांति भंग करने का प्रयास... जबकि पुलिस ने खुद ही अपने इस्तगासे... में खुद यह कबूल किया है कि.... आरोपी नेपा वसूली पर अड़ा था... अब उन परिस्थितियों की कल्पना कीजिये कि... किस मजबूरी में पुलिस ने... आरोपी पर अड़ीबाजी और धमकाने की धाराओं... का आरोपी नहीं बनाया... साधारण धाराओं में... आरोपी बना कर... अपने कर्तव्य की इति श्री कर ली....? पुलिस की कार्यवाही से... ग्रामीणों के हौसले पस्त और.. आरोपियों के मस्त हो जाने का वातावरण... बना तो है...? अब आप भी कहेंगे कि... हमारी अजब पुलिस ने... गज़ब कार्यवाही को अंजाम... देने में किन परिस्थितियों से सुलह की होगी.....।


Post A Comment: