दैट सिली गर्ल.... काव्य की नजर से
पुस्तक समीक्षा
समीक्षक- 'मनीष माना'--------------------------------------दैट सिली गर्ल.... नाम है एक कहानी संग्रह का.... जिसको लिखा है मुकेश दुबे जी की कलम ने.... प्रकाशित किया है... किताबगंज प्रकाशन ने....। खास बात होती है.... किताब की समीक्षा... जो बताती है कि किताब को पढ़ कर क्या अहसास होता है....। अधिकांशतः सभी पुस्तकों की समीक्षा गद्य में ही होती है..... दैट सिली गर्ल की समीक्षा काव्यात्मक लहजे में की गई है....। इस अनूठी रचना के रचनाकार हैं.... मनीष 'माना'जी...। एमपी मीडिया पॉइंट पर आप इस समीक्षा को पढ़िये... पुस्तक पढ़ने की जिज्ञासा जाग जायेगी......
------------------------------------------------"दैट सिली गर्ल"
कहीं संवरती है आरज़ूकहीं मिलता है अधिकार
कुछ फूल रह गये किताबों में
है कहीं बरसता प्यार
एक तरफ़ है गुजरे हुए
प्रेशर कुकर की जवानी
और आज भी ताजा है
मेरे गाँव की प्रेम कहानी
कहीं दिल टूटते हैं
कहीं दिल मिलते हैं
है रिश्ता चाँदनी भरा
कहीं दीप जलते हैं
माशी माँ की ज़िंदगी
प्रेम है या रुसवाई
बड़ी ही अनूठी है
हर्षा की विदाई
कहानियों में है इंसानियत
लफ्ज़ हैं या चमकते पर्ल
जो भी है यारों
है...... "दैट - सिली गर्ल" ।
समीक्षक- ✍️मनीष 'माना'
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