लापरवाही
------------डेढ़ साल पहले मोटरसाइकिल ने मारी थी टक्कर,
अब जाकर पैर के अंदर से निकला चप्पल का टुकड़ा...

योगेश राजपूत, बुधनी एमपी मीडिया पाइंट
हमारी चिकित्सा व्यवस्था सदियों से संदेह के दायरे में रही है अब तक हमने किस्से कहानी और चुटकुले मैं ही सुना था कि डॉक्टर ऑपरेशन करते समय औजार मरीज के पेट में ही भूल गए, लेकिन इससे मिलता-जुलता एक वाकया हाल ही में सुनने को मिला, दशहरा मैदान के सामने कृषि कार्यालय के पास पॉलिथीन की तिरपाल में रहने वाले 52 वर्षीय नारायण सिंह राजपूत लगभग डेढ़ साल पहले मोटरसाइकिल दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हो गए थे जब वह रेहटी तिराहे पर अपने साथी की मोटरसाइकिल पर बैठकर चाय पी रहे थे तभी एक अज्ञात दोपहिया चालक ने उनके पैर में बुरी तरह से टक्कर मार दी जिससे उनका दायां पैर फ्रैक्चर हो गया और तलवे में बुरी तरह से चोट आई पहले तो उन्हें हंड्रेड डायल की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां उनका प्राथमिक इलाज कर हालत गंभीर होने पर होशंगाबाद के मीना अस्पताल में भर्ती कराया गया होशंगाबाद में ऑपरेशन कर प्लास्टर भी चढ़ा दिया गया हालांकि उनके पैर का फ्रैक्चर तो ठीक हो गया लेकिन पैर के तलवे में लगी चोट ठीक नहीं हो पाई घाव बढ़ता गया इलाज के दौरान उनका परिवार कर्ज में डूब गया जो लोडिंग ऑटो चला कर वह अपने परिवार का भरण पोषण करते थे उसकी रकम नहीं चुका पाने के कारण बैंक ने ऑटो भी जप्त कर लिया।बड़ा बेटा भोपाल में पड़ रहा है वहीं छोटा बेटा कुलदीप दसवीं कक्षा पास कर चुका था ऐसे में नारायण सिंह की पत्नी देवकी उसकी स्कूल की फीस नहीं भर पाई उनका कहना है कि डेढ़ लाख रुपए पति के इलाज में लग चुका था दवाइयां चल रही थी ऐसे में फीस भरना इतना जरूरी नहीं था जितना पति के लिए दवाइयां लाना वे छोटे बेटे और पड़ोसियों की मदद से अपने पति को लेकर इस अस्पताल से उस अस्पताल के चक्कर लगाती रहीं।
इस बीच वे बुधनी के सरकारी अस्पताल भी पहुंचे लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया और तकलीफ बढ़ती गई चमत्कार तो तब हुआ जब एक दिन नारायण सिंह अपनी पत्नी की मदद से पैर का घाव साफ करवा रहे थे उन्हें पैर के अंदर कोई वस्तु नजर आई उन्होंने हिला कर देखा तो जमकर तकलीफ हुई वे फिर होशंगाबाद के एक निजी अस्पताल पहुंचे एक्स-रे करवाया डॉक्टर का कहना था कि हड्डी बढ़ गई है कुछ दिन मामला ऐसा ही चलता रहा लेकिन नारायण सिंह की पत्नी देवकी का कहना था कि यह हड्डी नहीं बल्कि कोई और चीज ही नजर आ रही है पिछले हफ्ते दशहरा मैदान में कुछ साथियों के साथ चर्चा करते समय नारायण सिंह ने स्वयं घाव से बाहर निकल रही उस वस्तु को हिम्मत दिखाकर खींच दिया जानकर सभी अचंभित रह गए डेढ़ साल में सरकारी और निजी अस्पताल के डॉक्टर जिसे हड्डी बता रहे थे वह कुछ और नहीं बल्कि दुर्घटना के समय नारायण सिंह ने पहन रखी चमड़े की चप्पल का टुकड़ा निकला जो अभी भी उनके पास उपलब्ध है और तो और वह इस पूरी घटना को लेकर किसी से कोई शिकवा शिकायत नहीं रखते लेकिन वह सिसकते हुए कहते हैं कि जो मजाक उनके साथ हुआ है वह किसी और गरीब के साथ ना होl वहीं पत्नी देवकी ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रही है कि अब उनके पति ठीक से चलने लगेंगे और उनके बच्चों की पढ़ाई भी चालू हो जाएगी।

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