आष्टा/दिनेशशर्मा

ग्राम पंचायत कन्नौद मिर्जी बनी भ्रष्टाचार  का प्लेग्राउंड !

 आष्टा ब्लाक की ग्राम पंचायतें इन दिनों पूरी तरह से  भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर जिम्मेदारों के लिए अवैध कमाई की टकसाल बनी हुई हैं।

 इस कारण...

ग्रामीणों को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओंका लाभ, 

विकास भी कागजों में ही रहकर वास्तविकता से बहुत दूर ... 

  राज्य व केंद्र सरकार  अनेको लोक कल्याणकारी योजनाएं चला कर , इन  योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर गरीब , मजदूरों के जीवन स्तर को उंचा उठाने के भले ही लाख दावे कर रही हो,  पर जमीनी हकीकत  एकदम इसके विपरीत है। दरअसल  प्रशासन की उदासीनता  कहे या मिलीभगत , पर ग्राम पंचायतो में सरपंच , सचिवों द्वारा जमकर बेखोफ भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसके चलते हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। ओर  इसकी बानगी के रूप में  कन्नौद मिरजी पंचायत है   जो जिम्मेदारों की स्वार्थ पूर्ति के साधन मात्र बन कर रह गयी है ।इस ग्राम  पंचायत में जब हमने जाकर देखा,  ओर लोगो से जाना तो   गांवों का विकास कोसो दूर तक नजर नही आया    बल्कि  वास्तविकता से परे होकर कागजों मे ही सिमटा दिखाई दिया ।  भ्रष्टाचार की इंतहा  वाली पंचायत की बानगी के रूप में  आष्टा ब्ला के तहत आने वाली बड़ी पंचायत कन्नौद मिरजी  को देखकर आसानी से अंदाजा  लगाया जा सकता है।
जहां के गरीब आज भी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। और साधन-संपन्न,अमीर, अपात्र लोग सरपंच-सचिव की मेहरबानी से  योजनाओं का लाभ लेकर मजे लूट रहे हैं।

योजनाओं से वंचित गरीब असहाय महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का खुला आरोप है , कि उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर जिम्मेदारों द्वारा मोटी रकम की फरमाइश की जाती है । जो फरामाईश पूरी नहीं करते उनको योजना का लाभ नहीं मिलता।
यही कारण है कि कई परिवार अभी भी टूटे-फूटे कच्ची झोपड़ियों मे निवास करने को मजबूर हैं । इसके अलावा जिन लोगों को आवास योजना का लाभ मिला उन्हें आधी-अधूरी राशि दिये जाने से आवास महीनों बाद भी अधूरे है। हैरानी की बात तो यह है कि मजदूरों के जॉब कार्ड सचिव व रोजगार सहायक अपने पास ही रखते हैं। बाताया जाता है कि उनमें फर्जी मजदूरी चढ़ाकर बैंककर्मी से सांठगांठ कर राशि हड़प लेते हैं। ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल रहा, मनरेगा से सम्बंधित श्रम वाले कार्य  भी अधिकतर जेसीबी व अन्य मशीनों से हुए हैं , हैरत वाली बात तो यह है कि इस तरह की गम्भीर अनियमिताओं को आज तक कोई जिम्मेदार  व सक्षम अधिकारी देखने तक नहीं पहुंचा जबकि इस पंचायत के भ्रस्टाचार की शिकायत एक जागरूक ग्राम वासी द्वारा लिखित में भी जनपद  कार्यालय आष्टा में की जा चुकी है। गांव के गरीब परिवारों को रोजी-रोटी के संकट से जूझना पड़ रहा है। गांव का विकास भी  पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।स्थिति यह है विकास के नाम पर शासन से बजट तो भरपूर प्राप्त किया गया है, पर   विकास धरातल पर दिखाई न देकर कागजों में ही सिमट कर रह गया है। दूसरी तरफ जरूरतमंद आज भी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित होकर बद से बदतर जीवन जीने के लिए विवश है ।कन्नौद  मिरजी ग्राम पंचायत कहने को ओडीएफ हो गई परन्तु यहां कई घरों में शौचालय नहीं है ऐसे मे बड़ी  संख्या में ग्रामीणों को शौच के लिए खुले में ही जाना पड़ता है।  जबकि गांव , कागजों में महीनों पहले ही ओडीएफ घोषित हो चुका हैं।
जमीनी हकीकत यह है कि जो गिनतीवार शौचालय बने है वह भी बगैर छत के होकर बेतरतीब बने है , जो अभी अनुपयोगी दिखाई दे रहे है साथ ही भारी भ्रष्टाचार की कहानी स्वयं ही कह रहे हैं । यही वजह है कि ग्रमीण जन आज भी घरों से बाहर ही शौच के लिए जा रहे है, ।
विधवा , वृद्ध और निशक्तजनों को  समय से पेंशन  भी नहीं मिलती है ,  इसके चलते  कई बार जरूरतमंद रोटी-रोटी से परेशान हो जाते है ,  लेकिन हैरत वाली बात यह है कि प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस  तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। और  न ही कोई सक्षम अधिकारी ने आज तक जरूरी समझा कि पंचायतों की हकीकत क़्या है ?
 कन्नौद मिरजी पंचायत के  सरपंच,सचिव से इस के बारे में जब गांव वालों ने जानकारीे हासिल की , तो पता चला कि  पंचायत के दोनो जिम्मेदार राजनीति में  अच्छी खासी पकड़  बनाये हुए  है । इस कारण अधिकारी इन पर कार्रवाई करने मे गुहरेज करते हैं वैसे भी यहाँ  महिला सरपंच,प्रधान है, पर  हैरत की बात तो यह है कि यहाँ पर आज भी गांव वाले  अपनी सरपंच को नही पहचानते है ,  क्योंकि  पंचायत का पूरा काम सरपंच पति ही सम्भालता है, इस तरह सचिव और सरपंच प्रतिनिधि ही पूरी तरह से मनमानी कर मजे लूट रहे है , गरीब आज भी शासन की ओर आस लगये बैठा हुआ है।

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