लेखिका
संक्षिप्त बातों का
संक्षिप्त सा अर्थ
बिन बादल के वर्षा
सा लगता है
वो कह जाती है वह बातें भी
जिनको सोचना भी स्वयं में
ही अद्भुत सा लगताहै.....
कुछ कहना सुनना
फिर सुनकर कहना
पहरों तक यूं ही "फिर"
कुछ गुमसुम सी रहना
कभी चंचल नदी से तो
कभी मृत समुद्र सा होना
भावो में रहकर भी
भाव रहित सा होना
खुद में रहकर भी
खुद में न रहना
तकना क्षितिज के
उस पार ,व्यर्थ ही
किसी का इंतजार
संपादक
संक्षिप्त
संक्षिप्त बातों का
संक्षिप्त सा अर्थ
बिन बादल के वर्षा
सा लगता है
वो कह जाती है वह बातें भी
जिनको सोचना भी स्वयं में
ही अद्भुत सा लगताहै.....
कुछ कहना सुनना
फिर सुनकर कहना
पहरों तक यूं ही "फिर"
कुछ गुमसुम सी रहना
कभी चंचल नदी से तो
कभी मृत समुद्र सा होना
भावो में रहकर भी
भाव रहित सा होना
खुद में रहकर भी
खुद में न रहना
तकना क्षितिज के
उस पार ,व्यर्थ ही
किसी का इंतजार
"मणिकर्णिका"
-------------------------------परिचय
मणिकर्णिका पांचाल सूर्यवंशी , देश की राजधानी दिल्ली की रहने वाली हैं। आप गृहिणी के रूप मरण भी साहित्य सेवा का समय निकालती हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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