मिसाल बनते रायपुर महापौर एज़ाज़ ढ़ेबर
अपने कार्यों से बनाई अलग पहचान

विजया पाठक

एडीटर जगत विज़न
            
छत्‍तीसगढ़ प्रवास के दौरान इस बार यहां करोना के कारण बड़ी मनहुसियत सी महसूस हुईं। अपने घर के पास कल मैंने जमावड़ा देख रूक कर पता किया तो मालूम चला कि रायपुर महापौर एज़ाज़ ढ़ेबर करोना काल में रायपुर की गली-गली जाकर इस संक्रमण के दौरान निवासियों की परेशानियों को फील्‍ड पर रहकर खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों ने बताया कि महापौर एज़ाज़ ढ़ेबर शहर के हर वार्ड में अपनी देख-रेख में साफ-सफाई, नालियों की सफाई और पेड़ों की कटाई करवाते हैं। यह भीड़ उन्‍हीं कार्यों को देखने की लगी है। लोगों का कहना है कि यह कार्य एक कार्यक्रम के तहत होता है। मतलब सामूहिकता से लोगों के सहयोग से होता है। हालांकि मेरी एज़ाज़ ढ़ेबर से पूर्व में कभी मुलाकात नही हुईं पर उनकी यह पहल सुनकर मैं उनसे बात करने पहुंच गई। सोचा कि इस पर एक पोस्‍ट बनाकर डाला जायें कि इस कठिन समय में जहां ज्‍यादातर राजनीतिक अपने घरों में संक्रमण के डर से बैठे हुए हैं ऐसे समय में एक नेता सड़क पर उतर कर निवासियों का दु:ख दुर कर रहे हैं एवं सबके लिये मिसाल पेश कर रहे हैं। पूरे रायपुर में इस तरह से चल रहे कार्यक्रम से महापौर की एक अलग पहचान बनाई है। साथ ही महापौर जन-जन से जुड़कर रायपुर को एक अलग शहर बनाने की मुहिम में लगे हैं।
            
                     लेखिका

उनके एक सहयोगी ने वहां मुझें बताया कि एज़ाज़ ढ़ेबर रायपुर के मौलाना अब्‍दुल, राऊफ वार्ड से कांग्रेस प्रत्‍याशी के रूप में दूसरी बार पार्षद चुने गए थे। राज्‍य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद नगर पालिक निगम के मेयर के चुनाव में बदलाव किया गया। जिसके तहत जिस पार्टी के सबसे ज्‍यादा पार्षद चुनकर आए हैं उसी पार्टी के पार्षद को महापौर नियुक्‍त किया गया। मतलब पार्षदों के द्वारा बहुमत के आधार पर महापौर की प्रक्रिया अपनाई गई। सबसे ज्‍यादा मतों से जीतकर आए एज़ाज ढ़ेबर को महापौर चुना गया। शपथ ग्रहण समारोह की भी विशेषता रही कि 21 श्‍लोकों द्वारा मंत्रोचार के साथ, एज़ाज़ ढ़ेबर ने शपथ ग्रहण किया। एज़ाज ढ़ेबर धर्म, जाति और साम्‍प्रदाय से हटकर सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाए के हिमायती हैं। स्‍व. अजीत जोगी के कार्यकाल में अपनी राजनीति की शुरूआत एनएसयूआई के अध्‍यक्ष के रूप में की। वे एक संर्घषशील एवंज जुझारू राजनेता के रूप में जाने जाते हैं। भाजपा सरकार में जब वह पहली बार पार्षद बने तो अपने वार्ड को सबसे स्‍वच्‍छ और आधुनिक वार्ड का अवॉर्ड दिलवाया। वर्तमान में उनका एक ही लक्ष्‍य है कि पूरे शहर को शुद्ध पेयजल, स्‍वच्‍छ शहर बनाना है।
           निश्चित तौर पर एज़ाज़ ढ़ेबर युवा हैं, आधुनिक विचारधारा के हिमायती हैं। भेद-भाव और दलगत राजनीति से दूर विकास पर भरोसा करते हैं। ऐसे महापौर से दूसरे अन्‍य महापौर को भी प्रेरणा लेनी चाहिए, जो शहरों के लोगों के बीच ही भेद-भाव पर विश्‍वास करते है। रायपुर महापौर के करोना काल में ऐसे पॉजिटिवीटी से भरे कदम ने कम से कम मुझे काफी प्रभावित किया। मैं उन्‍हें भविष्‍य के लिये शुभकामनाऐं देती हूँ कि ऐसे ही रायपुर की जनता के लिये काम करते हुए देश में अपनी एक अलग मिसाल पेश करेंगे।
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