लेखक 

 उलझे रहते हैं जीवन की रफ्तार से हम

सोचो तो क्या पाएंगे अब आपस की तक़रार से हम
नफ़रत के फल खाएंगे बस नफ़रत की इस ड़ार से हम

बरसों से चाहत में ज़िंदा लाशों जैसी हालत है
थोड़ी सी इज्ज़त दे दो फिर मर जाएंगे प्यार से हम

दुनिया वालो दो पल ख़ामोशी है बस दरक़ार हमें
कब से आजिज़ हैं इस दुनियादारी की गुफ़्तार से हम

अपनी भी तो यारो शीशे जैसी ही तो फ़ितरत है
क्यों ये सोचें जुड़ जाएंगे अब उनके इक़रार से हम

तुम को क्या बतलाएं सुख क्या जीवन के उस पार है क्या
उलझे उलझे रहते ख़ुद ही जीवन की रफ़्तार से हम

बलजीत सिंह बेनाम, हिसार, हरियाणा

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परिचय

         बलजीत सिंह बेनाम, हिसार, हरियाणा के रहने वाले हैं। संगीत अध्यापक होने के साथ साथ काव्य विधा में साहित्य साधना भी करते हैं। विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ करते आ रहे हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं। 
विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित भी हो चुके हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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