लेखिका
करे हम हिंदी का राष्ट्र निर्माण
अपनी माता को दे ,
उसके होने का प्रमाण
अंजान में हमसे हो गया
पाप , अनर्थ अज्ञान
अपनी माता के होते जब
ढूंढा 'दूजी' में व्यर्थ का ज्ञान
माँ को मम्मी बना कर हमने
व्यर्थ किया अभिमान
पिता को डेड बोल कर देते
ज्ञानी होने का प्रमाण
भूल गये हम भाषा अपनी
वर्षो रहे गुलाम
अपनी कायरता क्या देंगे
इससे बड़ा प्रमाण
सितम्बर की चौदह को बस हम
करते उसका ध्यान
इसलिए दिला न पाये उसे
राष्ट्र भाषा का सम्मान
अब तो जागो बोलो अब तो
कहाँ सोया है स्वाभिमान
मातृभाषा हिंदी को दिलाओ
अन्तर्राष्ट्रीय पहचान
हिंदी
करे हम हिंदी का राष्ट्र निर्माण
अपनी माता को दे ,
उसके होने का प्रमाण
अंजान में हमसे हो गया
पाप , अनर्थ अज्ञान
अपनी माता के होते जब
ढूंढा 'दूजी' में व्यर्थ का ज्ञान
माँ को मम्मी बना कर हमने
व्यर्थ किया अभिमान
पिता को डेड बोल कर देते
ज्ञानी होने का प्रमाण
भूल गये हम भाषा अपनी
वर्षो रहे गुलाम
अपनी कायरता क्या देंगे
इससे बड़ा प्रमाण
सितम्बर की चौदह को बस हम
करते उसका ध्यान
इसलिए दिला न पाये उसे
राष्ट्र भाषा का सम्मान
अब तो जागो बोलो अब तो
कहाँ सोया है स्वाभिमान
मातृभाषा हिंदी को दिलाओ
अन्तर्राष्ट्रीय पहचान
मणिकर्णिका पांचाल सूर्यवंशी , दिल्ली
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