लेखिका
खुशी
****दरीचों से झाँकती
कुछ खुशियाँ...
आज चिल्लाकर मुझपे
फूट पड़ी...
शब्दों की सारी बेड़ियाँ तोड़कर
हँसते हुए रो पड़ी ,
और बोली...
क्यूं बंद है
तेरे ये दिल के द्वार?
जो खुशियों की फुहार
भीतर आना चाहे
तो कैसे आए ?
तेरे अश़्कों के इन मोतियों को
यूं ना बहा...
तेरे भीतर कैद
इन हसीऩ लम्हों को
ज़रा पंख लगा...
आ...तुझे आसमाँ की
सैर कराऊँ..!
मैंने कहा...
पल भर की मेहमान हैं
ये खुशियाँ..
जाने कब मेरा साथ छोड़ दें
और ये दर्द
मेरी जा़गिर...
जो दर्द से प्रेम कम हुआ
तो जीना मुश्किल होगा..!
ये सुनकर..
खुशियाँ ..फिर से दरीचों से झाँकने लगी..!
#रश्मि वैष्णव उदयपुर राजस्थान
----------------------परिचय
रश्मि वैष्णव ,उदयपुर राजस्थान की निवासी हैं। -एम. एससी बायोटेक्नोलॉजी के साथ ही आपको साहित्यिक रुझान बना रहा। दस वर्षों से लेखन में सक्रिय रहते हुए आपकी रचनाएँ विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रही हैं। आप का एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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