स्पेशल स्टोरी

ऐतिहासिक किला पूरी तरह से अतिक्रमणकर्ताओं के गिरफ्त में..


आष्टा/दिनेशशर्मा                                        एमपी मीडिया पाइंट 

आष्टा शहर के कई बेशकीमती स्थानों सहित अब ऐतिहासिक किला भी पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ़ गया है । शहर को अपनी पहचान  देने  वाला,  अनुपम हरियाली की छटा बिखेरता रहने वाले  इस  विशाल किला को   जिस तरह से चारो तरह से अतिक्रमणकर्ताओं ने घेर लिया है ओर जिस बेतरतीब तरीके व स्वरूप में लोग मकान बना कर रह रहे है , उससे साफ  है कि शहर के यह ऐतिहासिक धरोहर  अपना अस्तित्व लगभग खो  चुकी है,  किन्तु बेतरतीब निर्माण से  लोगो को जरा भी अपनी जान माल की चिंता नही है , ।  वही शहर का विशेष सौंदर्य लिए रहने वाला किला मानो आज  गुम हो गया है।



अतिक्रमणकारियों ने जिस तरह अपनी जान की परवाह किये बगैर नीचे से ऊपर  बेतरतीब मकान बना रखे है,  इनको बारिश के समय हर पल धटना दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है , ओर स्थानीय प्रशासन सब कुछ जानते हुए  कुछ नही कर पा रहा है , 


सैकड़ो वर्ष हो गए  राजा अजयपाल का किला आष्टा शहर के  बीचोबीच होकर शहर की कभी  अनूठी पहचान हुआ करता था  किन्तु पिछले कुछ वर्षों से स्वार्थ से ग्रसित  राजनेताओं की शह पर  अतिक्रमणकारियों  ने पूरे किले को नीचे से ऊपर तक इस तरह घेर लिया कि यह किला अब धीरे धीरे मोत  कारण , ओर अनेको परेशानियों का सबब बन गया है।

बता दें कि पिछले दिनों 29 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश से किले की दीवार को खोद कर नीचे बने मकान पर ऊपर से किले की मिट्टी गिर जाने से मकान धराशायी हो गया ।और मकान में सो रहे लोगो मे 4 गम्भीर घायल हुए तो एक युवती की मलबे में दब जाने से मौत हो गयी । 
आपको बतादे की इस घटना से पूर्व भी किले की दीवार की मिट्टी एक मकान पर ओर गिर चुकी है , यहाँ कोई  कोई जन हानि   तो नही हुई थी पर अंदेशा हमेशा बना रहता है , बारिश में किले के नीचे ओर किले की मट्टी की दीवार पर मकान बना कर रह रहे इन परिवारों का जीवन पर हमेशा खतरा बना रहता है , 
इस किले के चारो तरह सीताफल की भरपूर झाड़ियां , व अनेकों पेड़ो के घने झरमुट किले की सुंदरता में हमेशा चार चांद लगाए रहते थे , किन्तु इन अतिक्रमणकर्ताओं ने किले का सारा का सारा हरियाली भरा सौंदर्य समाप्त कर दिया है , ओर आज यह किला पूरी तरह से अपनी वास्तविक पहचान  खो चुका है , 
यही हाल किले के ऊपर भी दिखाई दे रहे है , अंग्रेजो के समय से किले के ऊपर तहसील कार्यालय होता था , किन्तु बहुत जर्जर हालत होने से तहसील कार्यालय तो अपने नए भवन में स्थान्तरित हो गया पर इस खंडहर नुमा जर्जर भवन में आज भी तहसील के ही  सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 3 से 4 परिवार रह रहे है , जबकि अपनी उम्र पूरी कर चुकी यह  बिल्डिंग कभी भी अपना अस्तित्व खो कर धराशाही हो सकती है , ।
आश्चर्य है वरिष्ठ अधिकारियों  की जानकारी में होने के बाद भी  रोजाना अनेको जिंदगियों से खिलवाड़ किया जा रहा है ।
आपको बता दे जिस समय बारिश के समय किले की दीवार की मट्टी से माकन ध्वस्त हुआ था ठीक उसी समय किले की ऊँचाई लिए स्थित ऐतिहासिक शंकर मन्दिर की ऊपरी मिट्टी की सतह भी वहाँ गिरी थी जहाँ मन्दिर के पुजारी का पूरा परिवार  रहता है , ओर कोई बड़ी घटना होने से रह गयी  ।पुजारी का कहना है कि हम कई बार प्रशासन को अवगत करा चके है कि किले की ओर मन्दिर की ऊपरी सतह के साथ बड़ी दीवाल या बाउंड्री करवाई जावे , किन्तु कोई भी अधिकारी ने आज तक इस ओर ध्यान नही दिया। इस कारण आये दिन  जान का खतरा बना रहता है, ।
किले से पेड़ समाप्त होजाने से पूरे किले की मिट्टी पोली गयी है जो जरा सा पानी गिरने पर ही अपनी जगह छोड़ने लगती है ,  ओर गिरने लगती है , 
स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि किले के चारो तरफ रह रहे लोगो की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करना चाहिए ।नही तो कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकती है
कभी शहर की पहचान रहने वाले इस किले को जो हमेशा अपने अंदर हरियाली लिए अनुपम छटा बिखेरता रहता था ।आज राजनीति की भेंट चढ़ मानो समाप्त ही हो गया है  आपको बता दे कि किले पर चारो तरफ मकान बना कर रह रहे पट्टे धारी लोगो को स्थानीय नगरपालिका सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा तो करती है किंतु आज तक भी उनकी जान माल की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नही है।
 बसन्त जैन
  ( रहवासी किले की ऊपरी सतह के किनारे,आष्टा)

               एसडीएम रवि वर्मा , आष्टा

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