09 आदिवासी लोगो को वन भूमि  के पट्टे वितरित

आष्टा/दिनेशशर्मा,
एमपी मीडिया पाइंट 

 स्थानीय जनपद कार्यालय में गरीब कल्याण पखवाड़ा अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा अनुसूचित जनजाति के लोगो को वन अधिकार के पट्टों का वितरण किया गया ।विधायक के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । 

        ग्रामीण पट्टा ग्रहण करते

मध्यप्रदेश सरकार हमेशा ही वनों में रहने वाले आदिवासियों के उत्थान के लिए चिंतित रहती है , ओर समय समय पर कल्याणकारी योजनाएं चलाकर  इन आदिवासी परिवारों को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने का कार्य करती है , इसी रूपरेखा में जिन आदिवासियों के पास वन भूमि पर जितना कब्जा है , प्रति व्यक्ति अधिकतम  4 हेक्टेयर  के हिसाब से पट्टे देती रही है।
इस बार फिर जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय जनपद कार्यालय में एक समारोह आयोजित कर आष्टा तहसील के रजतजयन्ति ग्राम सिद्दीकगंज के आदिवासी बाहुल्य ग्रामो में शामिल श्यामपुरा के 09 आदिवासियो को उनके पास वर्षो से कब्ज़े मे रहने वाली जमीनों के आज आदिम जाति कल्याण विभाग सीहोर द्वारा भूमि पट्टे वितरित किये गए;
 पट्टो का वितरण विधायक रूगनाथ सिंह मालवीय  ने किया । उक्त पट्टे आवंटन का मामला विगत 2007 से जिला प्रशासन के पास विचाराधीन था , तत्कालीन समय मे हुए पट्टे वितरण में किसी कारण वश वंचित रहे  सैकड़ों लोगो मे से इन 09 लोगो को आज अपनी जमीन का वैधानिक अधिकार  दिया गया ।
यूं तो 2007 में हुए पट्टो के वितरण के बाद वंचित लोगो की सूची सेकड़ो में रही थी , ओर जब से ही पूरा मामला प्रकरण विचाराधीन था , ओर अब भी मात्र 9 लोगो का वन भूमि पर  कब्जा सही रूप में पाया गया , ओर बाकी लोग आज भी  अपना नाम नही होने से दुखी है , 


ओर यही कारण रहा , की आयोजित समारोह में कुर्सियां पूरे समय खाली ही पड़ी रही , ओर जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने अपनी कमियों को  छुपाने के लिए सरकार  द्वारा आदिवासियों के उत्थान के   लिए लिए इतने बड़े निर्णय ओर उसके सफल क्रियान्वयन वाले कार्यक्रम की सूचना मीडिया को देना भी उचित नही समझा ।

 सरकार का गरीब कल्याण पखवाड़ा अंतर्गत वन भूमियों के पट्टे वितरण वाला कार्यक्रम पूरी तरह से गिनतिवार लोगो की उपस्थिति में सिमट कर रह गया ।
    कार्यक्रम की सूचना किसी को देना या बताना उचित ही नहीं समझा गया, इसके पीछे क्या वजह हो सकती है यह तो जिम्मेदार ही जाने ,? क्योंकि  इस पट्टे वितरण कार्यक्रम के बारे में जब आष्टा वन विभाग से समझना चाहा तो अधिकारी ने सिरे से नकारते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से जिला प्रशासन द्वारा आयोजित है । फिर जिला  प्रशासन  ने सरकार के अमूल्य कल्याणकारी निर्णय व आदिवासियों को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने वाले इस कार्यक्रम के प्रचार प्रसार  का अभाव क्यों रखा यह भी समझ से परे नजर आ  रहा है , साथ ही  जिम्मेदारों ने मिडिया को भी  दूर रखा यह ओर आश्चर्यजनक का विषय बना रहा ।ऐसा लगता है की  कही यह कार्यक्रम पूरा ही प्रायोजित तो नही ?  ऐसा इसलिए  भी लगता है कि लगभग 500 लोगो के आवेदन में मात्र 09 लोग ही सही पाए  गये ? इस तरह सरकार का आदिवासियों के कल्याणार्थ कार्यक्रम पूरी तरह से  गैरजिम्मेदारों के भेंट चढ़ गया ।

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