स्व. शर्मा बहिन जी

आज के दिन न शीर्षक मिलते न शब्द, 
          ........पंक्तियाँ कहां से लाऊँ !

राजेश शर्मा 

कहते हैं मां धोखा नहीं देती,औलाद को हरहाल मे मौका देती,लेकिन मां ने मेरी ख्वाहिश को नेस्तनाबूत किया, 10 सितंबर 2017 को।

मुझे सिखाया था लड़ने का सलीका,जिंदगी से जूझने का तरीका लेकिन डेढ़ माह मे ही खुद कैंसर के कीड़ों से जंग हार गईं।

दिल बहलाने को सब कहते हैं तुम्हारी मां तुम्हारे साथ है। क्या धन,दौलत,शोहरत को आपकी मौजूदगी मान लूं__नहीं यह आपकी मौजूदगी नहीं_ क्योंकि मैने देखा है आपकी गरीबी का पालना, मैने देखा है बच्चों के लिए अपनी ख्वाहिशों को मारना, मैने देखा है पाई-पाई को बचाना--

मां तू नहीं तो कुछ नहीं । सिर्फ़ जिंदगी टेर करता हूँ तेरे दिल को दिलासा खुद देता हूँ . . .आपकी जन्म स्थली नरसिंहगढ़ की मिट्टी को सदैव प्रणाम करता हूँ।

लोग कहते हैं मां तू मेरे पास है लेकिन मैं समझता हूँ , मैं तुझसे अब कितना दूर हूँ... मुकम्मल मुकाम भी विधाता बताता नहीं, जाने क्यूँ वह भी रुठा सा रहता है। दिल मे जब भी मां तेरा ज़िक्र होता है मेरे दर्द को देख विधाता भी रोता है...

मैं उजड़े जमन की दास्तान बन गया हूँ। मै हकीकत मे खुद एक बयान बन गया हूँ। मेरी लेखनी की  "स्याही"  तुझे कसम है..मेरे अक्षरों को आकार देते रहना। जहां भी हो अच्छे से रहना। निशानी के रुप मे पिता अभी मौजूद हैं। मैं चेहरे मे उनके तेरा चेहरा देखता रहता हूँ--कुछ इस तरह जिंदगी का गुजर-बसर करता रहता हूँ।

कल्पना नहीं की थी तेरे बिना जिंदगी की, न जाने क्यूँ कल्पना से अब नजरें चार करता हूँ। 
मां सिर्फ़ एक मेरी ही नहीं, मैं तो सभी संतानों के संताप अपने शब्दों से व्यक्त करता हूँ जो तूने कोख मे मुझे सौंपे थे..

जानता हूँ..तुझे मेरे चेहरे को पढ़ना याद है अब तो तेरी तस्वीर से भी नज़रें चुराता हूँ क्योंकि सोचता हूं कहीं तू मेरे दर्द को देख न ले...
नहीं तो जन्नत छोड़कर दर्दभरे इस लोक मे फिर से मेरे पास आ जाएगी। 
निपट लूंगा तमाम झंझटों से मगर "यादों" से निपटना याद नहीं। 

मेरी आँखे अपने-आप धुल जाती हैं जब स्मरण मे आप आती हैं। 
जब वक्त 10 सितंबर का आता है क्या कहूँ ? चलती इस जिंदगी मे, मैं जिंदगी से रुठ जाता हूँ..लोग कहते हैं मैं शायर,कवि,साहित्यकार,पत्रकार हूँ__मगर कैसे मान लूं!!

बस कहता हूँ मैं, छोटी बाई का हर स्तर पर सबसे छोटा कहलाता हूँ। दुनियां की समस्त माताओं के चरणों मे शीश झुकाकर यही कहता हूँ ...   

                                 मां तुझे प्रणाम

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खासबात

.बता दें कि स्व.छोटी बाई शर्मा मध्यप्रदेश के इछावर नगर की प्रथम शिक्षिका रहीं और सतत् 42 वर्षों तक एक ही शा. कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल मे अध्यापन कार्य करती रहीं__आप समूचे नगर में "शर्मा बहिन जी" के नाम से जानी जाती थीं। एमए(हिंदी) के साथ-साथ आपने अन्य विषयों मे भी उपाधियां प्राप्त की। शिक्षा,साहित्य और संगीत के क्षेत्र मे आपका नाम आदर से लिया जाता है। और खासबात यह कि तत्कालीन भोपाल स्टेट के नवाबी शासनकाल के उस दौर मे सर्विस की, जब पर्दाप्रथा परवान चढ़ी हुई थी और महिलाओं के घर से निकलने तक पर परोक्ष प्रतिबंध हावी था। आप आगे चलकर अनगित महिलाओं की आदर्श  और प्रेरणास्रोत बन गईं। आज आपकी तृतीय पुण्यतिथि पर एमपी मीडया पाइंट पुण्य स्मरण के साथ आपको श्रद्धा से नमन करता है।
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