सोयाबीन फ़सल दे गई  दगा,
लागत भी नहीं निकली,

उल्टे जेब खर्च से फसल कटाई व थ्रेशिंग हुई..

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राजेश बनासिया भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट 

लगातार पिछले दो साल से किसानों के लिए सोयाबीन की फ़सल घाटे का सौदा साबित हो रही हैं पिछले साल भी क्षेत्र में सोयाबीन की फसल से किसान को कोई मुनाफा नही हुआ तो क्षेत्र में इस बार जिस हिसाब से सोयाबीन की फसल की लेकर अच्छी पैदावार के कयास लगाए जा रहे थे वो आखिर में सब फैल हो गए।


 क्योंकि क्षेत्र में लगभग 35 दिन तक बारिश की लंबी खेच पड़ी फिर जोरदार बारिश हुई तो फ़सल में पीला मोजेक नामक किट लग गया जिससे फसल पीली पड़ गई व जो बची थी वो अत्यधिक बारिश से खेतों में ही सड़ गई अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनोती है कि खेत को किसी भी तरह साफ करके अगली बोनी की तैयारी करना इसके लिए लोग हार्वेस्टर से खेतों में सड़ी गली  सोयबीन कि फ़सल को कटवा रहे है तो खेतो से इतनी भी फसल नही निकल रही है की उसे बेचकर हार्वेस्टर वाले के पैसे पूरे हो जाये अगली फसल की तैयारी में इस बार खेतो को साफ करना भी किसान की जेब पर भारी पड़ रहा है। भाऊँखेड़ी के किसान मांगीलाल वर्मा ने बताया कि आठ एकड़ जमीन से महज साढ़े तीन क्विंटल सोयाबीन निकली है वो भी साफ करने के बाद महज दो क्विंटल ही रह जायेगी वही आठ एकड़ में हार्वेस्टर का खर्च ही 11,हज़ार हो गया। इस तरह अबकी साल लागत भी नही निकली व कटाई भी जेब से ही करनी पड़ी।इस तरह दिनों दिन किसानों की स्थिति बेकार होती जा रही है वही 2019 का फसल बीमा भी कई किसानों को नही मिल पाया है व अबकी बार जो फ़सल खराब हुई है उसका निर्णय भी सरकार ने अभी नही किया है।

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