ग्राम भाऊँखेड़ी के गणेश,मण्डल हनुमान मण्डल,व ग्रामीणों ने नीलकंठ घाट से कावड़ भरकर कावड़ यात्रा प्रारंभ की जो सोमवार को ग्राम भाऊँखेड़ी पहंची जहां प्राचीन शिव मंदिर में सभी कावड़ियों ने भगवान शंकर की पूजा अर्चना के बाद नर्मदा के जल से भगवान शिव का जल अभिषेक किया जल भरकर पैदल निकले कावड़ियों का जगह जगह ग्राम में स्वागत किया गया। इछावर ब्लाक से 11 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम भाऊँखेड़ी में ग्राम के बीच स्थित है प्राचीन शिवालय जहाँ आज सावन के तीसरे सोमवार को भक्तो की अपार भीड़ देखने को मिली,ग्राम के शिव मंदिर में पूजा अर्चना का दौर सुबह से ही शुरू हो जाता है।स्कूल में पड़ने वाली छोटी छोटी बालिकाएं भी पूजा की थाल सजाके टोलियो में शिव मंदिर पहूँचती है और वहाँ भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चना करती है ग्राम के इस मंदिर की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन सी मांगी गई मन्नते पूर्ण होती होती है।मन्दिर बहुत ही प्राचीन है इसका निर्माण कब और किसने करवाया इसके ठोस प्रमाण किसी के पास नही है,मन्दिर में पत्थर की जो कला है वो वाकई देखने योग्य है।इस सावन के महीने में मन्दिर में विशेष पूजा अर्चना का दौर जारी है।
ग्राम भाऊँखेड़ी के गणेश,मण्डल हनुमान मण्डल,व ग्रामीणों ने नीलकंठ घाट से कावड़ भरकर कावड़ यात्रा प्रारंभ की जो सोमवार को ग्राम भाऊँखेड़ी पहंची जहां प्राचीन शिव मंदिर में सभी कावड़ियों ने भगवान शंकर की पूजा अर्चना के बाद नर्मदा के जल से भगवान शिव का जल अभिषेक किया जल भरकर पैदल निकले कावड़ियों का जगह जगह ग्राम में स्वागत किया गया। इछावर ब्लाक से 11 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम भाऊँखेड़ी में ग्राम के बीच स्थित है प्राचीन शिवालय जहाँ आज सावन के तीसरे सोमवार को भक्तो की अपार भीड़ देखने को मिली,ग्राम के शिव मंदिर में पूजा अर्चना का दौर सुबह से ही शुरू हो जाता है।स्कूल में पड़ने वाली छोटी छोटी बालिकाएं भी पूजा की थाल सजाके टोलियो में शिव मंदिर पहूँचती है और वहाँ भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चना करती है ग्राम के इस मंदिर की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन सी मांगी गई मन्नते पूर्ण होती होती है।मन्दिर बहुत ही प्राचीन है इसका निर्माण कब और किसने करवाया इसके ठोस प्रमाण किसी के पास नही है,मन्दिर में पत्थर की जो कला है वो वाकई देखने योग्य है।इस सावन के महीने में मन्दिर में विशेष पूजा अर्चना का दौर जारी है।



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