नहर के अंतिम छोर पर 40 वर्ष बाद पहुंचा पानी,
किसान हुए गदगद


राजेश बनासिया, भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
इछावर तहसील के सबसे बड़े तालाबों मे शुमार कांकरखेड़ा जलाशय की नहर का पानी आखिरकार 45 वर्ष बाद अंतिम छोर पर पहुंच गया। अब इस नहर के पानी से तीन गांव ओर लाभान्वित होने लगे हैं। अब किसान खुश-खुश नजर आ रहे हैं।
सन् 1974 में कांकरखेड़ा तालाब का निर्माण हुआ था व इस तालाब के निर्माण से सबसे ज्यादा सार्वधिक फायदा हुआ वह ग्राम कांकरखेड़ा के किसानों को।तालाब निर्माण के बाद इस तालाब से दो नहर निकाली गई पहली नहर कांकरखेड़ा व लसूड़ियाराम के लिए व दूसरी नहर भाऊँखेड़ी व जमोनिया हटेसिंह के लिए, बताया जाता है कि जमोनिया हटेसिंह से नहर ओर आगे ग्राम सुखलिया हंसराज तक बनना थी मगर तालाब निर्माण का जिस हिसाब से लंबा चौड़ा सर्वे हुआ था उस हिसाब से तालाब किन्ही कारणों से छोटा बना दिया गया ।जिससे नहर जमोनिया हटेसिंह ग्राम के कृषको के कुओं तक ही सीमित रही नहर उस समय पूर्णता कच्ची बनी हुई थी। तीन वर्ष पहले नहर को सीमेंट-कंक्रीट किया गया था इसके बाद भी नहर के आखरी छोर पर पानी नही पहुँच पाता था,स्थिति यह थी कि नहर का पानी भाऊँखेड़ी के किसानों के खेतों तक ही मुश्किल से पहुँच पाता था अब लोग कयास लगा रहे हैं कि आखिरी छोर तक पानी पहुँचने का मुख्य कारण अधिक बारिश का होना बता रहे है मगर हकीकत ये है कि अबकी साल नहर को चालू करने से पहले नहर जमी मिट्टी को मजदूरों से बाहर फिकवाया वही नहर की सफाई हुई व सख्त नियम भी बना दिये जिसके तहत फालतू पानी बहाना,बगैर रसीद से इंजन मोटर पंप चालाना, इन सब पर सख्ती के बाद नहर के आखरी छोर पर पानी पहुँच पाया है जिससे सभी किसान की फसलों में भरपूर पानी जा रहा है जिससे किसान खुश-खुश नजर आ रहे है।
एसडीओ जल संसाधन विभाग रवि वैन ने बताया कि इस वर्ष तालाबों से सिंचाई के नए नियम लागू होने के कारण नहरों से ज्यादातर किसान लाभांवित हो रहे हैं। कांकरखेड़ा जलाशय की नहर से अब कांकरखेड़ा,लसूड़ियाराम,भाऊँखेड़ी,जमोनिया हटेसिंह के सैकड़ों किसान लाभांवित हो रहे हैं।

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