पशु चिकित्सकों की मनमानी का खामियाजा़ भुगत रहे पशुपालक
हुकुमसिंह मेवाड़ा, ब्रिजिशनगर एमपी मीडिया पाइंट
सीहोर जिले मे पशु चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं। कई पशु चिकित्सालय पर डॉक्टर पहुंचते नहीं है,तो कई पशु चिकित्सालय पर डॉक्टर पहुंच तो जाते हैं मगर पशु का इलाज नहीं करते है। बस पशु चिकित्सालय पर बैठकर ही लाखों रुपए वेतन लेते हैं। सरकार से पशु चिकित्सालय के डॉक्टरों की मनमानी का खामियाजा़ भुगत रहे पशुपालक।
ऐसा ही एक मामला
इछावर तहसील मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर स्थित ग्राम ब्रिजिशनगर मे देखने को मिला जहां पशु चिकित्सालय कई वर्षों से बना हुआ है उस पशु चिकित्सालय में दो डॉक्टर पदस्थ हैं
जिनका नाम
डॉक्टर नरेंद्र सिंह दूसरे का नाम डॉक्टर जसराज सिंह भाटी है
लेकिन दोनों ही मुख्यालय पर नहीं रहते हैं। अंयत्र स्थान से अपडाउन करते हैं।कभी आते हैं तो कभी नहीं आते, आते भी हैं तो पशु चिकित्सालय में ही बैठे रहते हैं।नहीं जाते कहीं पशुओं का इलाज करने जब कोई पशुपालक पशु चिकित्सालय में डॉक्टर के पास जाता है तो अपने पशु का इलाज करवाने के लिए उनको बताता है तो वह दोनों डॉक्टर पशुपालक से यह कह देते हैं कि आपको अपकी पशु चिकित्सालय ब्रिजिशनगर में . पशु भैंस गाय बकरी को लेकर आना होगा जब जाकर आपके पशुओं का इलाज होगा यही कहते डॉक्टर मुख्यालय पर ही बैठ कर वेतन लेते हैं। जिसका खामिया पशुपालक को भुगतना पड़ रहा है। पशुपालकों की माने तो उनका कहना है कि इछावर तहसील का सबसे बड़ा गांव ब्रिजिशनगर है इस गांव को सेक्टर माना जाता है।इसलिए शासन ने यहां पर पशु चिकित्सालय बनवाया है। जहां ब्रिजिशनगर के आसपास के क्षेत्र के गांव फांगिया,मोगरीवाली बीट, बिजीसनगर, मगरा, कनेरिया, बोरदीकला ,गुराड़ी, धाईखेड़ा, बावरियाचोर, आदि गांव के भी पशुपालक अपने पशुओं का इलाज करवा सकते हैं।
मगर इन डॉक्टरों के हौसले इतने बुलंद हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं किसी पशुपालक के घर जाकर पशु का इलाज नहीं करते हैं यह पशुपालक से यह कह देते हैं कि पशु चिकित्सालय लेकर आना पड़ेगा आपको तो आपकी पशु का इलाज होगा नहीं तो नहीं होगा। ऐसे में बेचारे पशुपालक अपनी कई मवेशियों से जैसे भैंस गाय बकरियों से हाथ धो बैठते हैं इस तरह की मनमानी के चलते नहीं देते डॉक्टर पशुपालकों की बात पर ध्यान
एक तरफ तो राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार पशु पालने के लिए पशुपालकों को कई योजनाओं के माध्यम से लोन भी दिया जाता है जिससे पशुपालक पशुओं को पाल सके और अपना पशु का दूध बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट भर सके और सरकार को सब्सिडी काटकर पशुपालक टाइम पर अपना लोन भी चुका जा सके।
मगर पशु बीमार हो जाने पर डॉक्टरों की मनमानी के चलते पशु ही जीवित नहीं रहते हैं ऐसे हाल में पशुपालक अपना परिवार का पेट भरेगा की सरकार से लिया हुआ लोन जमा करेगा।
ऐसे में हालात यह बन रहे हैं कि इछावर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार देखने को मिल चुके हैं।
यह कहते अधिकारी
आपके दरमियां मामला सामने आया है मैं जिंला पशु चिकित्सालय में पत्र लिखूंगा जांच के लिए।
आरएस मरावी, तहसीलदार, इछावर
हुकुमसिंह मेवाड़ा, ब्रिजिशनगर एमपी मीडिया पाइंट
सीहोर जिले मे पशु चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं। कई पशु चिकित्सालय पर डॉक्टर पहुंचते नहीं है,तो कई पशु चिकित्सालय पर डॉक्टर पहुंच तो जाते हैं मगर पशु का इलाज नहीं करते है। बस पशु चिकित्सालय पर बैठकर ही लाखों रुपए वेतन लेते हैं। सरकार से पशु चिकित्सालय के डॉक्टरों की मनमानी का खामियाजा़ भुगत रहे पशुपालक।
ऐसा ही एक मामला
इछावर तहसील मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर स्थित ग्राम ब्रिजिशनगर मे देखने को मिला जहां पशु चिकित्सालय कई वर्षों से बना हुआ है उस पशु चिकित्सालय में दो डॉक्टर पदस्थ हैं
जिनका नाम
डॉक्टर नरेंद्र सिंह दूसरे का नाम डॉक्टर जसराज सिंह भाटी है
लेकिन दोनों ही मुख्यालय पर नहीं रहते हैं। अंयत्र स्थान से अपडाउन करते हैं।कभी आते हैं तो कभी नहीं आते, आते भी हैं तो पशु चिकित्सालय में ही बैठे रहते हैं।नहीं जाते कहीं पशुओं का इलाज करने जब कोई पशुपालक पशु चिकित्सालय में डॉक्टर के पास जाता है तो अपने पशु का इलाज करवाने के लिए उनको बताता है तो वह दोनों डॉक्टर पशुपालक से यह कह देते हैं कि आपको अपकी पशु चिकित्सालय ब्रिजिशनगर में . पशु भैंस गाय बकरी को लेकर आना होगा जब जाकर आपके पशुओं का इलाज होगा यही कहते डॉक्टर मुख्यालय पर ही बैठ कर वेतन लेते हैं। जिसका खामिया पशुपालक को भुगतना पड़ रहा है। पशुपालकों की माने तो उनका कहना है कि इछावर तहसील का सबसे बड़ा गांव ब्रिजिशनगर है इस गांव को सेक्टर माना जाता है।इसलिए शासन ने यहां पर पशु चिकित्सालय बनवाया है। जहां ब्रिजिशनगर के आसपास के क्षेत्र के गांव फांगिया,मोगरीवाली बीट, बिजीसनगर, मगरा, कनेरिया, बोरदीकला ,गुराड़ी, धाईखेड़ा, बावरियाचोर, आदि गांव के भी पशुपालक अपने पशुओं का इलाज करवा सकते हैं।
मगर इन डॉक्टरों के हौसले इतने बुलंद हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं किसी पशुपालक के घर जाकर पशु का इलाज नहीं करते हैं यह पशुपालक से यह कह देते हैं कि पशु चिकित्सालय लेकर आना पड़ेगा आपको तो आपकी पशु का इलाज होगा नहीं तो नहीं होगा। ऐसे में बेचारे पशुपालक अपनी कई मवेशियों से जैसे भैंस गाय बकरियों से हाथ धो बैठते हैं इस तरह की मनमानी के चलते नहीं देते डॉक्टर पशुपालकों की बात पर ध्यान
एक तरफ तो राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार पशु पालने के लिए पशुपालकों को कई योजनाओं के माध्यम से लोन भी दिया जाता है जिससे पशुपालक पशुओं को पाल सके और अपना पशु का दूध बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट भर सके और सरकार को सब्सिडी काटकर पशुपालक टाइम पर अपना लोन भी चुका जा सके।
मगर पशु बीमार हो जाने पर डॉक्टरों की मनमानी के चलते पशु ही जीवित नहीं रहते हैं ऐसे हाल में पशुपालक अपना परिवार का पेट भरेगा की सरकार से लिया हुआ लोन जमा करेगा।
ऐसे में हालात यह बन रहे हैं कि इछावर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार देखने को मिल चुके हैं।
यह कहते अधिकारी
आपके दरमियां मामला सामने आया है मैं जिंला पशु चिकित्सालय में पत्र लिखूंगा जांच के लिए।
आरएस मरावी, तहसीलदार, इछावर


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