नरवाई जलाने पर कलेक्टर ने लगाई रोक, लेकिन जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान,
नरवाई जलाने का कोई केस अबतक थाने मे नहीं
सीहोर/इछावर
एमपी मीडिया पाइंट
कलेक्टर अजय गुप्ता के निर्देशानुसार संपूर्ण जिले में रबी फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इस सिलसिले में अपर कलेक्टर अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री विनोद कुमार चतुर्वेदी द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30 उपधारा (X)(XVIII) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी कर दिया गया है।
जारी आदेशानुसार संपूर्ण जिले के लिए यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है कि कोई भी व्यक्ति नरवाई नहीं जलाएगा अथवा खेत में आग नहीं लगाएगा। यह आदेश संपूर्ण जिले में निवास करने वाली सभी व्यक्तियों तथा अस्थायी तौर से आने जाने वाले समस्त व्यक्तियों पर लागू होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है उसके विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत प्रकरण कायम कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर 31 मई 2020 तक की अवधि के लिए प्रभावशील होगा।
ज्ञात हो कि किसानों द्वारा फसल काटने के बाद खेत को साफ करने की दृष्टि से खेतों में आग लगा दी जाती है जिसे नरवाई जलाना कहते हैं। यह चलन कई बार लोक परिशांति भंग करने की स्थित उत्पन्न करता है तथा मानव जीवन और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। साथ ही इससे आसपास की फसलों और मकानों को आग के कारण नुकसान पहुंचता है उससे किसी आपदा की स्थिति की आशंका बनी रहती है।
दूसरी तरफ गांवों से नरवाई जलाए जाने के समाचार लगातार प्राप्त हो रहे हैं ।
प्रशासन की रोक के बाद भी किसान नरवाई में आग लगा रहे हैं। कई किसान हार्वेस्टर से काटी गई फसल के बाद शेष बची खेत की नरवाई को जला रहे है। इछावर ब्लॉक के ग्राम नादान,समापूरा,अलीपुर, गुराडी,आदि ग्रामों में खुलेआम अपने खेत की नरवाई में आग लगा रहे है और जब आग काफी विकराल रूप ले लेती है जिससे आग फैलने का भी खतरा बना रहता है। शासन मुनादी कराकर लोगों से अनुरोध कर रहा हैं कि अपने खेत की नरवाई में आग न लगाएं। लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। आग के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा हैं तथा वातावरण के तापमान में वृद्धि हो रही है। जमीन की उर्वाशक्ति भी क्षीण होती जा रही है। खासबात यह है कि नरवाई जलाने पर हरवर्ष प्रतिबंध लगाया जाता है लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव मे यह प्रतिबंध असरहीन ही साबित साबित होता रहा है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि अगर आप अपने खेत में आग न लगाए तो किसान को हर तरह से फायदे का सौदा हो सकता है। जैसे उसी नरवाई से भूसा तैयार कर उसे बेंच कर मुनाफा कमा सकते हैं। इससे खेती की अन्य तरह की लागत को निकाला जा सकता है। अगर किसान अपने खेत में रोटावेटर कृषि यंत्र से अपने खेत की नरवाई को बारीक कराकर मिटटी में मिला दे तो बारिश होने के बाद खेत में दबी हुई नरवाई से खेत की जैविक संपदा में वृद्धि होगी।
अगर खेत में गेहूं की फसल को काटने के बाद उस खेत में आग लगाते है तो किसान को हर तरह से नुकसान झेलना पड़ सकता है। खेत में आग लगाने से खेत की जैविक क्षमता कम होती है। जिससे फसल को नुकसान होता है। खेत के सूक्ष्म व लाभकारी जीव नष्ट हो जाते है, जो फसलों के लिए लाभकारी साबित होते है। वहीं आग के कारण खेत की ऊपरी सतह कठोर हो जाती है, जिससे बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है।
नरवाई जलाने का कोई केस अबतक थाने मे नहीं
एमपी मीडिया पाइंट
कलेक्टर अजय गुप्ता के निर्देशानुसार संपूर्ण जिले में रबी फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इस सिलसिले में अपर कलेक्टर अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री विनोद कुमार चतुर्वेदी द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30 उपधारा (X)(XVIII) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी कर दिया गया है।
जारी आदेशानुसार संपूर्ण जिले के लिए यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है कि कोई भी व्यक्ति नरवाई नहीं जलाएगा अथवा खेत में आग नहीं लगाएगा। यह आदेश संपूर्ण जिले में निवास करने वाली सभी व्यक्तियों तथा अस्थायी तौर से आने जाने वाले समस्त व्यक्तियों पर लागू होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है उसके विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत प्रकरण कायम कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर 31 मई 2020 तक की अवधि के लिए प्रभावशील होगा।
ज्ञात हो कि किसानों द्वारा फसल काटने के बाद खेत को साफ करने की दृष्टि से खेतों में आग लगा दी जाती है जिसे नरवाई जलाना कहते हैं। यह चलन कई बार लोक परिशांति भंग करने की स्थित उत्पन्न करता है तथा मानव जीवन और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। साथ ही इससे आसपास की फसलों और मकानों को आग के कारण नुकसान पहुंचता है उससे किसी आपदा की स्थिति की आशंका बनी रहती है।
दूसरी तरफ गांवों से नरवाई जलाए जाने के समाचार लगातार प्राप्त हो रहे हैं ।
प्रशासन की रोक के बाद भी किसान नरवाई में आग लगा रहे हैं। कई किसान हार्वेस्टर से काटी गई फसल के बाद शेष बची खेत की नरवाई को जला रहे है। इछावर ब्लॉक के ग्राम नादान,समापूरा,अलीपुर, गुराडी,आदि ग्रामों में खुलेआम अपने खेत की नरवाई में आग लगा रहे है और जब आग काफी विकराल रूप ले लेती है जिससे आग फैलने का भी खतरा बना रहता है। शासन मुनादी कराकर लोगों से अनुरोध कर रहा हैं कि अपने खेत की नरवाई में आग न लगाएं। लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। आग के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा हैं तथा वातावरण के तापमान में वृद्धि हो रही है। जमीन की उर्वाशक्ति भी क्षीण होती जा रही है। खासबात यह है कि नरवाई जलाने पर हरवर्ष प्रतिबंध लगाया जाता है लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव मे यह प्रतिबंध असरहीन ही साबित साबित होता रहा है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि अगर आप अपने खेत में आग न लगाए तो किसान को हर तरह से फायदे का सौदा हो सकता है। जैसे उसी नरवाई से भूसा तैयार कर उसे बेंच कर मुनाफा कमा सकते हैं। इससे खेती की अन्य तरह की लागत को निकाला जा सकता है। अगर किसान अपने खेत में रोटावेटर कृषि यंत्र से अपने खेत की नरवाई को बारीक कराकर मिटटी में मिला दे तो बारिश होने के बाद खेत में दबी हुई नरवाई से खेत की जैविक संपदा में वृद्धि होगी।
आग से होता है खेत को नुकसान
अगर खेत में गेहूं की फसल को काटने के बाद उस खेत में आग लगाते है तो किसान को हर तरह से नुकसान झेलना पड़ सकता है। खेत में आग लगाने से खेत की जैविक क्षमता कम होती है। जिससे फसल को नुकसान होता है। खेत के सूक्ष्म व लाभकारी जीव नष्ट हो जाते है, जो फसलों के लिए लाभकारी साबित होते है। वहीं आग के कारण खेत की ऊपरी सतह कठोर हो जाती है, जिससे बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है।



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