शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती किताब.... 
                           पुस्तक 
                           समीक्षक
हमारी शिक्षा प्रणाली पर प्रश्न उठते रहे हैं किन्तु इस मूलभूत आवश्यकता के कारण हमारी असंतुष्टि प्रखर विरोध का रूप नहीं ले पाती | विद्यालयों और विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से निजी संस्थानों में व्याप्त अव्यवस्था और भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है | निजी शिक्षण संस्थान अब लूट का अड्डा बन चुके हैं | लेकिन हाल के कुछ वर्षों में स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ी आपराधिक घटनाएँ अधिक चिंताजनक हैं|
सामाजिक विषयों को अपनी कहानियों का विषय बनाने के लिए विख्यात लेखक गौरव शर्मा 'लक्खी' ने इस बार स्कूलों में होने वाले यौन शोषण को अपने नॉवेल 'इट आल हप्पेनेड इन अ स्कूल' में एक कहानी के माध्यम से दर्शाया है |
पेटल्स पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक स्कूली व्यवस्थाओं पर करारा तंज है | यह कहानी निजी शिक्षण संस्थानों के औचित्य पर प्रश्न उठाते हुए न केवल उनमें घटित होने वाले अपराधों को उजागर करती है बल्कि इन अपराधों को जन्म देने वाली लचर व्यवस्था पर भी बेबाकी से प्रकाश डालती है |

'इट आल हप्पेनेड इन अ स्कूल' गाज़ियाबाद निवासी लेखक गौरव शर्मा 'लक्खी' की पांचवी पुस्तक है | इस नॉवेल का विमोचन २५ जून को हुआ |  कहानी का मुख्य पात्र सौभाग्य कौशिक एक आदर्श अध्यापक है जो दो भिन्न धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित एक अनोखे परन्तु भ्रष्ट स्कूल में कार्यरत है | सौभाग्य के नए नए प्रयोग न तो स्कूल के संचालकों को रास आते हैं और न ही उसके सह-अध्यापकों  को |

स्कूल में कार्यरत पंखुड़ी खन्ना, सौभाग्य की मित्र है | विद्यालय के डिप्टी-चेयरमैन का बिगड़ैल बेटा पंखुड़ी का बलात्कार कर उसकी हत्या कर देता है | सौभाग्य के बहुत प्रयत्न के बावजूद पुलिस अपराधी को गिरफ्तार नहीं करती | तभी स्कूल में एक पॉँच वर्ष की अबोध बच्ची का बलात्कार हो जाता है | इस बार भी सौभाग्य अपराधी को सजा दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देता है जबकि स्कूल के प्रबंधक मामले को दबा देना चाहते हैं |
बिना किसी लागलपेट के निजी शिक्षण संस्थानों की चकाचौंध के पीछे के वीभत्स सच को उजागर करती यह पुस्तक अमेज़न , फ्लिपकार्ट व पुस्तकमंडी पर उपलब्ध है। 


- निधि मुकेश भार्गव, दिल्ली

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(पुस्तक के लेखक व समीक्षक दोनों ही एमपी मीडिया पाइंट के नियमित स्तम्भकार हैं)
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