लेखिका 
शोख़ चंचल यह हसीना, कर रही भव पार।
याद में पिय को समेटे , अंग में भर प्यार ।।

साथ अद्भुत दे रहा है , ख़ुशनुमा जब वक्त।
प्रीत में खुद को बिसर यूँ, मोहना की भक्त।।

खेवता है कौन नैया , है कहाँ यह होश ।
डूब कर ही हो मिलन जब, हो गई मदहोश।।

प्रीत ही प्रारब्ध इसका , प्रीत ही है अंत।
है अमित यह छाप अनुपम, श्याम जूं हैं कन्त।।

पार नैया को कराना , आपका है काम ।
बिन सहारा चल पड़ी है , ले हरि का नाम।।

आस की चादर लपेटे , जी रही इक नार।
आसरे की छांव देना , और विस्तृत प्यार।।

अर्चना लाल , जमशेदपुर, झारखंड

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 परिचय

अर्चना लाल, जमशेदपुर झारखंड की निवासी हैं। हिंदी से मास्टर डिग्री होने के साथ ही साहित्य सेवा में निरंतर रत हैं। इसीका सुखद परिणाम है कि आपके तीन साझा काव्य संग्रह
अनुभूति, मधुबन और कवयित्री सम्मेलन नाम से प्रकाशित हो चुके हैं। 
आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। आपको काव्य गौरव सम्मान , साहित्यदीप शलाका सम्मान और नारायणी सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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