मंत्रिमंडल गठन टला, एक दर्जन नामों पर संगठन तैयार नहीं
मंत्रिमंडल विस्तार टलने के बाद प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व्ही डी शर्मा और संगठन मंत्री सुहास भगत की तिकड़ी दिल्ली दरबार में माथा पच्ची कर लौट आई है। बुधवार को देवशयनी एकादशी है इसके बाद शुभ काम देव उत्थान एकादशी तक नहीं हो पाएंगे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कोई रास्ता निकलने की स्थिति में कल मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।
दिल्ली में बीते दो दिन में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वे गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की।
सोमवार काे यह चर्चा तेज हो गई थी कि संभावित मंत्रियों के नाम फाइनल हो गए हैं और 30 जून को शपथ ग्रहण हो जाएगा लेकिन बाद में सियासी घटनाक्रम एकदम बदल गया। अचानक प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दिल्ली बुलाया गया। उस समय ये कयास लगाए जाने लगे कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन संभव है लेकिन अब यह अटकलें भी खामोश हो गई हैं। परंतु यह चर्चा गर्म है कि मंत्रिमंडल के विस्तार का क्या होगा।
इस बारे में सूत्र बताते हैं कि संगठन ने अगर नए चेहरों को मौका दिया तो इस बार एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ विधायकों का मंत्री बनना मुश्किल होगा। इनमें विजय शाह, रामपाल सिंह,गोपाल भार्गव,राजेंद्र शुक्ल, प्रेम सिंह पटेल, पारस जैन, नागेंद्र सिंह, करण सिंह वर्मा, सुरेंद्र पटवा,जगदीश देवड़ा, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्नोई, भूपेंद्र सिंह के नाम शामिल है।ये सभी पिछली तीन भाजपा सरकारों में मंत्री रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश संगठन शिवराज के पिछले कार्यकालों में मंत्री रहे वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका देना चाहता है।मुख्यमंत्री चाहते हैं कि यह निर्णय बाद में लिया जाए। सिंधिया समर्थकों में से सभी बड़े नेताओं को मंत्री बनाया जाता है तो भाजपा के पास पद कम बचेंगे। संगठन चाहता है कि एक-दो लोगों को रोककर उन्हें उपचुनाव के बाद मंत्री बनाया जाए।
भोपाल एमपी मीडिया पॉइंट
शिवराज सरकार का 30 जून को होने वाला बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल का संभावित विस्तार टल गया है।साथ ही इन अटकलों को जोर मिल गया है कि भाजपा संगठन शिवराज की पसंद के एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर युवा चेहरों को मौका देने के मूड में दिखाई दे रहा है।मंत्रिमंडल विस्तार टलने के बाद प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व्ही डी शर्मा और संगठन मंत्री सुहास भगत की तिकड़ी दिल्ली दरबार में माथा पच्ची कर लौट आई है। बुधवार को देवशयनी एकादशी है इसके बाद शुभ काम देव उत्थान एकादशी तक नहीं हो पाएंगे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कोई रास्ता निकलने की स्थिति में कल मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।
दिल्ली में बीते दो दिन में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वे गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की।
सोमवार काे यह चर्चा तेज हो गई थी कि संभावित मंत्रियों के नाम फाइनल हो गए हैं और 30 जून को शपथ ग्रहण हो जाएगा लेकिन बाद में सियासी घटनाक्रम एकदम बदल गया। अचानक प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दिल्ली बुलाया गया। उस समय ये कयास लगाए जाने लगे कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन संभव है लेकिन अब यह अटकलें भी खामोश हो गई हैं। परंतु यह चर्चा गर्म है कि मंत्रिमंडल के विस्तार का क्या होगा।
इस बारे में सूत्र बताते हैं कि संगठन ने अगर नए चेहरों को मौका दिया तो इस बार एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ विधायकों का मंत्री बनना मुश्किल होगा। इनमें विजय शाह, रामपाल सिंह,गोपाल भार्गव,राजेंद्र शुक्ल, प्रेम सिंह पटेल, पारस जैन, नागेंद्र सिंह, करण सिंह वर्मा, सुरेंद्र पटवा,जगदीश देवड़ा, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्नोई, भूपेंद्र सिंह के नाम शामिल है।ये सभी पिछली तीन भाजपा सरकारों में मंत्री रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश संगठन शिवराज के पिछले कार्यकालों में मंत्री रहे वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका देना चाहता है।मुख्यमंत्री चाहते हैं कि यह निर्णय बाद में लिया जाए। सिंधिया समर्थकों में से सभी बड़े नेताओं को मंत्री बनाया जाता है तो भाजपा के पास पद कम बचेंगे। संगठन चाहता है कि एक-दो लोगों को रोककर उन्हें उपचुनाव के बाद मंत्री बनाया जाए।


Post A Comment: