अर्धनारिश्वर(कविता)


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                           लेखिका 

आज  शिवमय है संसार ,
    शिव की महिमा शिव ही जाने
तीन लोक के पालनहार
जाने अंजाने  जो भी जपता
सबके दुख हरते ,दुख हरता
आशुतोष,तू औढरदानी
तेरे भक्त सभी अज्ञानी  
कंद मुल से खुश हो जाते
नंदी बैल है तेरी सवारी 
,गले सर्प की माला प्यारी 
हे त्रिपुरारी तेरी लीला न्यारी
भूत पिशाच देव और मानव
सबके साथी सबके बाबा 
नाच नचाते सबको रिझाते
  फिर भी भोले नाथ कहाते 
कण कण में तु रमता जोगी
होकर के बिल्कुल मनमौजी
एक नजर जो डाले होते
हे शिवशंकर सब दुख हरते
कैसे करुँ पूकार मैं तेरी
भाव भक्ति मैं जानू  ना
हे अभयंकर हे करुणा कर
मुझ में ऐसी भाव जगा दे
शिव की लीला में खो जाऊँ 
शिव के समान बस रमण करुं मैं
ओम-ओम का ध्वनि करुं मैं
    मेरा बेरा पार लगाना,,
निश्छल जानकर शरण तू देना,
गंगाजल मैं ला नहीं पाया
बस तेरी ही शरण में आया
हे शिव शम्भो हे करुणाकर
हे औढरदानी जगत परमेश्वर
माँ भवानी संग विराजे,
 दैहिक सुख भी समझ आ जाये
स्वीकार करो अब मेरा प्रणाम
जीवन नैया पार लगाना,,
कभी मुझे  तुम ना बिसराना
    चेतन हों या अवचेतन मन 
मौन हों या मौत का आगोश
ओम की ध्वनि सुनाई दे
बस इतनी सी दया करना भगवन ।।

आरती राय, मनीला, फिलिपींस

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